ईस अध्याय मे बौद्धि वृक्ष पीपल के विभिन्न नाम की चर्चा करेंगे। नाम ईस प्रकार है यथा बोध्रिय,राजतुल ,मूर्त अंश ,पिपल,वृक्ष राज,कल्प तरू ,सौरवृक्ष ,अवश्यवत्थ,चल- पत्र आदि । बौद्धि वृक्ष पीपल के विभिन्न नामों मे वोध्रिद्र का अर्थ बुद्धि प्रदान करने वाले वृक्ष से है। चुकि शाक्य मुनि गौतम को पीपल वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ था।इसलिए ज्ञान देने वाला पेड का नाम बौध्रिद्र सार्थक है। इसी तरह इस वृक्ष का नाम पीपल अर्थात जिनके पते ,छाल ,जड ,इसा दूध एंव पंचाग का काढा नियमित रूप से पेय योग्य है। इसलिए पीपल इनका नाम पीपल है। इस तरह ईस पेड का नाम चल पत्र है।इसका अर्थ है पेड का पता डोलता रहता है। इसका नाम  सौर वृक्ष इसलिए है कि सुर्य प्रकाश की उपस्थिति में होने वाली प्रकाश संशलेषण प्रकिया को स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है।जो प्राण वायु का स्रोत है अतः यह सौर वृक्ष है।इसका नाम अवश्यत्थ का अर्थ शक्ति बलशाली से है।तथा अवश्य स्थान घोडे पडाव या हाथी का भोजन प्राचीन काल राहगीर पीपल पेड के नीचे अपने घोडे को उसी मे बाँध कर विश्राम करते थे,इसलिए यह पेड घोडे का पडाव स्थान होने के कारण यह अशव स्थान अशवत्थ है। दूसरा अशवत्थ का प्रयोग हाथी के लिए भी प्रयोग किया गया है ,आज भी प्रायः देखा जाता है कि हाथी का मुख्य भोजन पीपल छाल व पता ही है। इसप्रकार उर्दू भाषा मे ईस पेड का नाम इसकी औषधीय गुणों के कारण पेडों मे सबसे उच्चतम स्थान प्राप्त होने के कारण दरख्ते लरजा है और हिन्दी मे ईन्हें वृक्ष राज अर्थात् वृक्षों का राजा कहा गया है। अगले चतुर्थ अध्याय मे शरीर शुद्धि मे अंतरग इंतजार करे । पीपल नीम तुलसी अभियान ।

Categorized in : All News देश स्पेशल