चिराग पासवान द्वारा जानकारी दी गयी कि उनके पिता केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान का 74 साल की उम्र में गुरूवार को दिल्ली में निधन हो गया। काफी समय से उनकी तबीयत ख़राब थी और वे अस्पताल में भर्ती थे।केंद्र की अधिकतर सरकारों में मंत्री रहे पासवान ने कई सरकारों में अहम भूमिका भी निभाई थी।उन्हें राजनीति का मौसम वैज्ञानिक कहा जाता था। राम विलास पासवान – सारे देश के लोगों ने ये नाम सुना 1977 के चुनाव के बाद। ख़बर ये थी कि बिहार की एक सीट पर किसी नेता ने इतने अधिकत्म वोट के अंतर से चुनाव जीता कि उसका नाम गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में शामिल हो गया। उस चुनाव में राम विलास पासवान ने जनता पार्टी के टिकट पर हाजीपुर की सीट से कांग्रेस उम्मीदवार को सवा चार लाख से ज़्यादा मतों से हराकर पहली बार लोकसभा में पैर रखा था। पासवान इसके आठ साल पहले ही विधायक का चुनाव जीत चुके थे। लेकिन 1977 की उस जीत ने राम विलास पासवान को राष्ट्रीय नेता बना दिया। अगले चार से भी ज़्यादा दशकों तक वो राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण पदों में आसीन रहे। वो नौ बार सांसद रहे,अपने 50 साल के राजनीतिक जीवन में केवल 1984 और 2009 में उन्हें हार का मुँह देखना पड़ा। 1989 के बाद से नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह की दूसरी यूपीए सरकार को छोड़ वो हर प्रधानमंत्री की सरकार में मंत्री रहे। वो तीसरे मोर्चे की सरकार में भी मंत्री रहे, कांग्रेस की अगुआई वाली यूपीए सरकार में भी और बीजेपी की अगुआई वाली एनडीए सरकार में भी. वो देश के इकलौते राजनेता रहे, जिन्होंने छह प्रधानमंत्रियों की सरकारों में मंत्रिपद संभाला। विश्वनाथ प्रताप सिंह से लेकर, एचडी देवगौड़ा, आईके गुजराल, अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी की सरकार में अपनी जगह बना सकने के उनके कौशल पर ही कटाक्ष करते हुए एक समय में उनके साथी और बाद में राजनीतिक विरोधी बन गए लालू प्रसाद यादव ने उन्हें ‘मौसम वैज्ञानिक’ कहा था। कहा जाता है, अपने सारे राजनीतिक जीवन में पासवान केवल एक बार हवा का रुख़ भांपने में चूक गए, जब 2009 में उन्होंने कांग्रेस का हाथ झटक लालू यादव का हाथ थामा और उसके बाद अपनी उसी हाजीपुर की सीट से हार गए जहाँ से वो रिकॉर्ड मतों से जीतते रहे थे। लेकिन उन्होंने अपनी उस भूल की भी थोड़ी बहुत भरपाई कर ली, जब अगले ही साल लालू यादव की पार्टी आरजेडी और कांग्रेस की मदद से उन्होंने राज्य सभा में जगह बना ली। लेकिन राजनीतिक बाज़ीगरी में माहिर समझे जाने वाले राम विलास पासवान शुरुआत में केवल राजनेता ही बनने वाले थे, ऐसा नहीं था।
देखना यह कि पीछे छुटे उनकी पहली पत्नी और बेटी जो उत्तराधिकारी की दावेदारी मानती है दूसरी पत्नी एवं बेटा चिराग पासवान अभिनेता से नेता का किरदार कैसे निभाते है