![]लेखिका-हर्ष प्रभा
प्रिय मित्रों जब से यह कोविड-19 कोरोना महामारी बीमारी भारत में आई इससे मुझे एक बात समझ में जरूर अाई। जो राज्य हरे भरे और जिनको हम हिल स्टेशन भी कह देते हैं उन राज्यों में कोरोना ना के बराबर निकला। जबकि भारत के दो फेमस राज्य मुंबई और दिल्ली जिनको भारत की शान कहा जाता है और दिल्ली को तो भारत का दिल भी कहा जाता है।इन दोनों राज्यों में मैंने यह देखा कि कोरोना के सबसे ज्यादा केस पाए गए हैं ।ऐसा क्या है इन दोनों राज्यों में जबकि यह दोनों राज्य सभी तरह की फैसिलिटी से परिपूर्ण है। मुंबई तो ख्वाबों की नगरी है जहां पर सभी हीरो बनने का सपना देखते हैं फिर भी इतने ज्यादा करोना केस।मैं लॉक डाउन में उत्तराखंड गई! यहां पर जो बाहर से लोग आ रहे थे उनको रोका जा रहा था। क्योंकि वहां की सरकार नहीं चाहती थी कि बाहर के लोग (बाकी राज्यों से)उत्तराखंड में भी कोरोना महामारी फैला दें। मैंने बहुत सोचा 4 दिन वहां रहकर और जाना कि यहां पर कोरोना केस कम क्यों है क्योंकि वहां की हरियाली, ताजी हवा, और वहां का वातावरण बाकी राज्यों से अलग है।क्योंकि जहां हरियाली होती है वहां आधी बीमारी तो वैसे ही खत्म हो जाती है क्योंकि प्रकृति में ऐसी अनोखी दवा है जो अनेकों बीमारी को खुद ही खत्म कर देती है। वहां कल-कल करती नदियां उनका ताजा पानी पर्वतों से आता हुआ वह भी एक बड़ा कारण है जो वहां के लोग कम बीमार पड़े।जबकि दिल्ली और मुंबई राज्य में जनसंख्या बहुत ज्यादा है और हरियाली बहुत कम।जहां हरियाली नहीं होंगी और सभी भौतिक सुविधाएं होंगी तो भौतिक सुविधाएं हमें कुछ टाइम के लिए तो सुकून दे सकती हैं लेकिन वही भौतिक चीजें हमें कुछ टाइम के बाद बहुत बड़ा नुकसान देने लगती है। यही कारण रहा है कि जो पर्यावरण वाले क्षेत्र में या हरियाली के क्षेत्र में लोग रहते हैं वह ज्यादा फिट होते हैं। उन की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रकृति खुद ही मजबूत करके रखती है।इसके मुकाबले जो लोग भौतिक सुखों से परिपूर्ण और प्रकृति से दूर रहने वाले राज्यों में रहते हैं उनकी इम्यूनिटी अंदर से कमजोर हो जाती है।आप माने या ना माने यह बिल्कुल सत्य बात है! पेड़ों से हरियाली है “ पेड़ों से खुशहाली है “ इनमें जड़ी बूटियां निराली है “ करती सेहत की रखवाली है “ फूलों की खुशबू और ताजी हवा “ ऐसी प्रकृति में है अनोखी दवा “ इसलिए नित नए पेड़ लगाओ “ अच्छी सेहत का तुम भी बीमा करवाओ!! ( डॉ हर्ष प्रभा)