![]लेखिका हर्ष प्रभा

सही बात तो यह है कि राम तेरी गंगा मैली हो गई लोगों के द्वारा गंगा में गंदगी डालते डालते। साइंटिस्टो ने घोषणा की थी कि यदि हमने गंगा नदी की सफाई और लोगों के द्वारा जो गंदगी नदियों में डाली जाती हैं पूजा के नाम पर उसको नहीं रोका तो 100 साल मैं गंगा नदी का पवित्र जल दूषित हो जाएगा। और अब आप करोना काल में ही देख लीजिए जब इंसान ज्यादा अत्याचार प्रकृति पर करता है। नदियों का जल दूषित करता है तो वह खुद को ठीक करने के लिए कुछ ना कुछ इंतजाम तो करती ही है। जिस तरह से हम बीमार होने पर डॉक्टर से अपना इलाज कराते हैं या फिर खुद को फिट रखने के लिए आराम करते हैं। उसी तरह से हमारी नदियों को भी खुद को फिट रखने के लिए आराम की आवश्यकता होती है। हम पाप करते हैं और सोचते हैं कि पवित्र नदी में जाकर नहा लेंगे तो हमारे पाप धुल जाएंगे।ऐसा बिल्कुल भी नहीं है अगर यह सत्य होता तो सबसे ज्यादा समय तक ना नहाने वाले लोग लद्दाख में हैं।वहां पर जब बच्चा पैदा होता है तब उसको नहलाया जाता है या फिर जब वह मृत्यु को प्राप्त हो जाता है तब उसको नहलाया जाता है। क्योंकि वहां का टेंपरेचर माइनस-20 डिग्री से भी नीचे रहता है वह तो कभी गंगा में नहीं नहाए।क्या वह लोग सबसे ज्यादा पापी हुए नहीं ऐसा बिल्कुल भी नहीं है।नदियों का पवित्र जल हमारी खेती के लिए, बिजली बनाने के लिए, हमारे पानी पीने के लिए हमारे डेली रूटीन के लिए काम आता है और उसी जल में हम पूजा की सामग्री और पॉलिथीन कुछ भी जो हमें लगता है उसमें हम नहाकर वही डाल कर आ जाते हैं। आपने उस गंगा में अपने पाप कहां धोए! आप तो और पाप कमा कर आ गए।

काफी बार तो मैंने खुद देखा है कि कुछ लोग गंगा के किनारे बैठ कर चाय पीते हैं। और चाय का झूठा कप उसी पवित्र गंगा नदी में फेंक देते हैं !यह बहुत ही दुख और शर्म की बात है ।एक तरफ जहां हम गंगा नदी को गंगा मां मानकर पूजते हैं।पवित्र जल की बोतल भर कर घर में रखते हैं।उसी में हम अपने झूठे गिलास हो फेकते हैं।

समय रहते हमें अपनी इन गंदी आदतों को सुधारना होगा वरना वह दिन दूर नहीं जब हम पानी के लिए भी तरसेंगे । प्रकृति के नियमों को कोई बदल नहीं सकता” एक ही रास्ता है खुद को और दूसरो को बदलो। (हर्ष प्रभा)

अधिक से अधिक पौधे लगाओ नदियों के जल को स्वच्छ बनाओ (हर्ष प्रभा)

ग्रीन इंडिया परिवार रिसर्च फाउंडेशन उत्तर प्रदेश अध्यक्ष, मातृ मंडल सेवा भारती हरनंदी महानगर अध्यक्ष डॉ हर्ष प्रभा

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