अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट

जगन्नाथपुरी — ऋग्वेदीय पूर्वाम्नाय श्रीगोवर्धनमठ पुरीपीठाधीश्वर अनन्तश्री विभूषित श्रीमज्जगद्गुरू शंकराचार्य पूज्यपाद स्वामी श्रीनिश्चलानन्द सरस्वती जी महाराज महायन्त्रों के प्रचुर प्रयोग के विपरीत प्रभाव के प्रति सचेत करते हुये संकेत करते हैं कि महायंत्रों के आविष्कार और प्रचुर प्रयोग से आध्यात्मिक उत्कर्ष का विलोप ही नहीं, अपितु भौतिक उत्कर्षका अवरोध और अन्त भी सुनिश्चित है । कारण यह है कि देहात्मवाद और पञ्चभूतों के अनर्गल दोहनवाद का नाम भौतिकवाद है । देहात्मवाद से अध्यात्मवाद का विलोप सुनिश्चित है तथा पञ्चभूतोंके अनर्गल दोहनवाद से भौतिक उत्कर्ष का अवरोध और अन्त भी अनिवार्य है ,उक्त हेतुओं से महायंत्रों के निर्माण को श्रीमन्वादि महिषियों ने उपपातकों में परिगणित किया है। महायंत्रप्रवर्तनम मनुस्मृति ११.६३ दाल में नमक, मिर्च तथा मसाला के तुल्य एवं आँखों में अंजन के तुल्य यन्त्रों का सीमित तथा सुखद प्रयोग ही श्रेयस्कर है।

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