अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट

जगन्नाथपुरी — ऋग्वेदीय पूर्वाम्नाय श्रीगोवर्धनमठ पुरीपीठ चार मान्य पीठों में से एक है। इस पीठ के पूर्वाचार्य पूज्यपाद श्रीधर स्वामी जी ने श्रीमद्भागवत गीता का प्रथम भाष्य प्रदान किया। इस पीठ के 142 वें शंकराचार्य स्वामी मधुसूदन तीर्थ जी ने शक्तिपाद को सिद्ध किया , 143 वें शंकराचार्य स्वामी भारती कृष्ण तीर्थ जी ने विश्व को वैदिक गणित प्रदान की , 144 वें शंकराचार्य स्वामी श्रीनिरन्जन देवतीर्थ जी गोवंश संरक्षण के लिये 72 दिनों का अनशन किया था। इसी परम्परा में वर्तमान 145 वें शंकराचार्य पूज्यपाद स्वामी श्रीनिश्चलानन्द सरस्वती जी महाभाग सनातन संस्कृति को पुनः सम्पूर्ण विश्व में प्रतिस्थापित करने के अभियान को संचालित कर रहे हैं। इसी परिप्रेक्ष्य में श्रीगोवर्धन मठ में आयोजित हिन्दू राष्ट्र संघ अधिवेशन के द्वितीय दिवस को आचार्य कुलेश्वर शास्त्री जी ने वैदिक मंगलाचरण तथा डॉ० इंद्रदेव चौधरी ने लौकिक मंगलाचरण में राष्ट्र भक्ति गीत की प्रस्तुति दी। प्रथम वक्ता डॉ० ओम शर्मा न्यूजर्सी अमेरिका ने भाव व्यक्त करते हुये कहा कि ब्रिटिश शासनकाल में कूटनीति के तहत सनातन संस्कृति की रीढ़ वर्णव्यवस्था को जात पात में परिवर्तित कर भारत की पहचान को विकृत किया है , इसको पुनर्स्थापित करने की आवश्यकता है। दूसरे क्रम पर कनाडा से नवनीत कौशल ने कहा कि हमारी संस्कृति की विरासत धरोहर हमारी कुल ,गोत्र एवं वंशपरम्परा है ,इस संबंध में नयी पीढ़ी को जानकारी के साथ गौरव भी होना चाहिये। डॉ० साधना जोशी टोरंटो कनाडा ने अनुभव साझा किया कि हमारी ताकत संयुक्त परिवार की अवधारणा है। संस्कार पाठशाला या पुस्तकों से प्राप्त नहीं होती , बचपन में घर के वातावरण एवं बुजुर्गों के सीख से ही क्रमशः अपने गौरवशाली संस्कृति के अतीत की जानकारी के साथ संस्कार पनपता है। आचार्य झम्मन शास्त्री ने पूज्यपाद पुरी शंकराचार्य जी के पावन सानिध्य में सनातन संस्कृति को प्रतिस्थापित करने के लिये विभिन्न प्रकल्पों की चर्चा की। उन्होंने बताया कि किस प्रकार श्रीगोवर्धन मठ में विज्ञान , अर्थ , राजनीति , रक्षा आदि विषयों पर विशेषज्ञों की सहभागिता के साथ आयोजित संगोष्ठियों से जिन्हें आधुनिक यांत्रिक विधा के द्वारा संचालित किया गया , भारत में ही नहीं पूरे विश्व में सनातन वैदिक आर्य संस्कृति एवं हमारे वेदादि शास्त्रसम्मत ज्ञान विज्ञान के प्रति आस्था बढ़ी है। अधिवेशन में श्रीमती अरूणा झा मकाऊ , डॉ एम० ए० कुमार मलेशिया , गिरीश पंत दुबई , कल्याण के संपादक राधेश्याम खेमका , कालीश्वर दास अमेरिका , डॉ० राजीव मिश्रा लंदन, रवि तिवारी नीदरलैंड ,अनुप ड्योरिया नाइजीरिया , अपूर्व उपाध्याय ने भी अपने अपने भाव प्रस्तुत किये। पूज्यपाद पुरी शंकराचार्य जी ने अधिवेशन में अपने उद्बोधन में कहा कि सच्चिदानन्द स्वरूप सर्वेश्वर जब श्रीराम- कृष्ण के रूप में अवतार लेते हैं तो दुष्टदलन के अभियान में देवतागण आदि सहयोगी के रूप में जुड़ते जाते हैं। इसी तरह सनातन संस्कृति के अनुरूप हिन्दू राष्ट्र संघ की अवधारणा ऊपर से संचालित हो रही है , दैवकृपा से सहयोगी भी मिलेंगे एवं अभियान भी सफल होगा। देहात्मवाद — भौतिकवाद मानसिकता पर गाढ़ी नींद का होना पानी फेर देता है। देहात्मवादियों के पास इस तर्क का उत्तर नहीं है कि विषयजन्य आनन्द को छोड़कर गाढ़ी नींद की आवश्यकता क्यों होती है ? गाढ़ी नींद में द्वंद नहीं रहता केवल अज्ञान ही शेष रह जाता है। गाढ़ी नींद समाधि की अवस्था है जिसमें हम सच्चिदानन्द स्वरूप के निकट पहुंँच जाते हैं।

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