अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट

जगन्नाथपुरी — ऋग्वेदीय पूर्वाम्नाय श्रीगोवर्धनमठ पुरीपीठाधीश्वर अनन्तश्री विभूषित श्रीमज्जगद्गुरू शंकराचार्य पूज्यपाद स्वामी श्रीनिश्चलानन्द सरस्वती जी महाराज जी सनातन सिद्धांत के अनुसार परम्परा गत आचार विचार की सर्वकालीन महत्ता प्रतिपादित करते हुये संकेत करते हैं कि विश्वस्तर पर अद्भुत परिदृश्य है , विश्व में सर्वत्र अद्भुत पलायन दृष्टिगोचर है। वनवासी विकसित गावों की ओर , ग्रामीण नगर की ओर , नगर निवासी राजधानी की ओर , राजधानी में रहने वाले अमेरिका , ब्रिटेन , कनाडा ,जर्मनी ,जापान और फ्रांँस की ओर पलायन कर रहे हैं। अमेरीका, ब्रिटेन आदि में परम्परा से रहने वाले भारत के तीर्थों, वनों , और कंदराओं की ओर इस आशा से भाग रहे हैं कि कहीं कोई सिद्ध मिल जाये। हिन्दू क्रिश्चियन, कम्युनिष्ट, मुसलमान बन रहे हैं । क्रिश्चियन, कम्युनिष्ट, मुसलमान रामायण, महाभारत और वेदों पर अनुसंधान कर रहे हैं। चर्चो में सनातनियों की पूजापद्धति और देवी, देवताओं की अनुकृति हो रही है। मूर्तिभंजक मूर्तिपूजा के पक्षधर हो रहे हैं। सनातनियों का भोजन , वस्त्र , आवास , शिक्षा , रक्षा , स्वास्थ्य , उत्सव-त्योहार , यातायात , सेवा , कला , न्याय और विवाहादि – विज्ञान विश्वमंच पर समादृत है । मातृ – पितृ – आचार्य – अतिथिदेव का आदर्श और दर्शन, ज्योतिष छन्द, व्याकरण तथा शब्दकोषादि सनातनियों के वैभव पर विश्व स्तम्भित है।

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