अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
रायपुर — स्वयं प्रतिदिन गोसेवा करते हुये अन्य लोगों को भी गोसेवा एवं गोरक्षा के लिये प्रेरित करने वाली मानव सेवा फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्षा एवं अखिल भारतीय शांति प्रतिष्ठान के छग प्रदेशाध्यक्षा सुश्री आयुषी पांडेय ने चर्चा के दौरान अरविन्द तिवारी से कहा कि गोरक्षा हम सबका परम कर्तव्य है क्योंकि हम हमेशा गौमाता के उपकारों के ऋणी रहते हैं। हिंदू धर्म एवं भारत देश में गौरक्षा, गोपालन और गौ पूजा का विशेष महत्व है। मानव एवं समाज की सुरक्षा के लिये जिस पौष्टिक आहार की आवश्यकता है उसमें गौदुग्ध अग्रणी है। जितने उपयोगी खनिज लवण ,रोग निरोधक व बलवर्धक, जीवन तत्व गाय के दूध में है वह और कहीं नहीं है। आयुर्वेद में भी गौ दुग्ध का ही प्रतिपादन है , धर्म ग्रंथों में भी जहांँ कहीं दूध की आवश्यकता का वर्णन है वहांँ गौरस का ही उल्लेख समझना चाहिये। दूरदर्शी ऋषियों को शारीरिक दृष्टि से गौवंश की उपयोगिता विदित थी। इसके अतिरिक्त वे उसके मानसिक और आध्यात्मिक गुणों से भी परिचित थे।आज यह आवश्यक है कि हम गौ रक्षा पर ध्यान दें और गौकृपा से अपनी आर्थिक ,मानसिक ,शारीरिक, आध्यात्मिक एवं धार्मिक स्थिति में सुधार लायें। हम सनातन हिन्दूओं के लिये यह बड़े ही दुर्भाग्य की बात है कि जिस देश में गोपूजा एवं गोरक्षा को धर्म माना जाता है उसी भारत देश में गोवंशों की सबसे अधिक दुर्गति है। आज सड़कों पर दिन हो या रात गायों का समूह बेसहारा ठंडी, गर्मी ,बरसात में सड़क पर घुमते या बैठे नजर आते हैं। जिसके चलते आये दिन वे दुर्घटना के शिकार हो जाती हैं। कभी कभी सड़क हादसे में वे अपंग भी हो जाती हैं तो कभी इनकी जानें भी चली जाती है। प्रतिदिन सूर्योदय से पहले ही कत्लखानों में लाखों गोवंशों की हत्या की जा रही हैं जिसका आंँकड़ा नहीं लगाया जा सकता। अगर गोवंशों की यही स्थिति रही तो वह दिन दूर नही जब भारत देश में गोउत्पाद की न्यूनता होगी और हमारी आने वाली पीढ़ी गोवंशों को केवल चिड़ियाघरों या फोटो में ही देख सकेंगे। अगर इसके लिये कोई ठोस कदम नहीं उठाये गये तो शीघ्र ही हमारे देश को विकट परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। मैं राज्य एवं केन्द्र सरकार से यह मांँग करती हूंँ कि गायों के संरक्षण के लिये गायों के हित में जल्द से जल्द उचित निर्णय लिये जायें। गाय हमारी माता है और माता की सेवा करना हमारा परम कर्तव्य है। गाय हमारे जीवन का मूलाधार है , अगर हम सब भारतीय ही अपनी संस्कृति की रक्षा नहीं करेंगे , अपने धर्म को महत्व नहीं देंगे तो हमारा सर्वनाश सुनिश्चित है।
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