अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
नई दिल्ली — केन्द्र सरकार द्वारा पारित किये गये कृषि विधेयकों के खिलाफ देशव्यापी प्रतिरोध दिवस के आह्वान पर कई किसान संगठनों के अलावा विपक्षी दल भी कल 25 सितंबर को राष्ट्रव्यापी बंद को सफल बनाने के लिये कमर कस लिये हैं। देश भर के किसानों में इन विधेयकों को लेकर व्याप्त गुस्से के मद्देनजर आज रेलमार्ग और राजमार्ग बाधित हो सकते हैं। इसे देखते हुये केंद्र एवं राज्य सरकारें बड़े पैमाने पर पुलिस बंदोबस्त कर चुकी हैं। किसान संगठनों का कहना है कि अगर सरकार ने उन्हें रोकने या किसानों पर बल प्रयोग करने जैसा कोई कदम उठायेगी तो केंद्र और संबंधित राज्य सरकार को उसका खामियाजा भी भुगतना पड़ेगा। किसान संगठनों के अनुसार मोदी सरकार ने कृषि उपज वाणिज्य और व्यापार ( संवर्धन और सुविधा), मूल्य आश्वासन एवं कृषि समझौता और आवश्यक वस्तु अधिनियम (संशोधन) अध्यादेश को लोकसभा में अपने पूर्ण बहुमत का फायदा उठाते हुये तथा राज्यसभा में विपक्षी दलों के विरोध को दबाते हुये बिना मत विभाजन के गैर लोकतांत्रिक तरीके से विधेयक के रूप में पारित करा लिया। कृषि विधेयक का अध्यादेश लाने के समय से ही देश के किसान विरोध कर रहे हैं। हरियाणा व पंजाब के किसान व्यापक पैमाने पर सड़क पर विरोध करते रहे फिर भी सरकार अपना दमनात्मक व अड़ियल रवैया अपनाते हुये किसान हितैषी होने का भ्रामक प्रचार कर रहा है। किसान समझ चुके हैं कि यह विधेयक किसानों व कृषि के लिये कब्रगाह के अलावा कुछ दूसरा नहीं है इसलिये इस अध्यादेश का देश भर के किसानों ने विरोध करने का निर्णय लिया है। लॉकडाऊन के चलते किसान अपने गांँवों से शहरों को जोड़ने वाले सड़कों पर निकलेंगे, तो कहीं जिला, ब्लॉक, तहसील मुख्यालयों पर प्रदर्शन करेंगे।देश के बड़े किसान संगठन ‘अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) के अनुसार देश के हर राज्य किसानों के साथ खड़ा है , तकरीबन सभी राज्यों में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन होंगे जिससे किसानों का यह बंद पूरी तरह कामयाब रहेगा। संगठन के अनुसार अब किसान और धोखा नहीं सहेगा। समय आ गया है कि किसान विरोधी सरकार को उसी की भाषा में जवाब दिया जाये। किसानों की समस्याओं को उठाने वाले करीब ढाई सौ संगठन हैं। वे सब अपने अपने तरीके से बंद को सफल बनाने की रणनीति तैयार कर चुके हैं। दक्षिण भारत के राज्यों में भी इस बंद का व्यापक असर देखने को मिलेगा। कृषि संबंधित बिल किसानों के हित में नही है , जहाँ तक लाभ की बात है वह केवल निजी कंपनियों को होगा। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिये अनाज खरीदने वाली संस्थायें जैसे फूड कार्पोरेशन आफ इंडिया का भी अस्तित्व नही बचेगा। केन्द्र सरकार ने इन विधेयकों को लेकर किसानों के साथ विचार विमर्श करना भी जरूरी नही समझा। यही वजह है कि सभी किसान संगठन इसका विरोध कर रहे हैं। अगर कोई राजनीतिक दल किसानों के साथ आता है तो उसका स्वागत है। किसान संगठनों के अनुसार लाकडाऊन के चलते किसान अपने गाँवों से शहरों को जोड़ने वाले सड़कों पर निकलेंगे तो कहीं जिला , ब्लाक एवं तहसील मुख्यालयों पर प्रदर्शन करेंगे। उनका प्रयास रहेगा कि किसान शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुँचायेंगे।
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