पत्रकार जगत की सबसे बड़ी विडंबना है कि खुद के बीच में खाई को पाटने की जरा भी नहीं सोचते और घर में लगी आग बुझा नहीं पाते । कोसो दूर लगी आग बुझाने में अपनी पब्लिसिटी दिखाने को सम्मान समझते है। महाराष्ट्र में हुए पत्रकार पर हमले की आवाज शहर के पत्रकार तो बन जाते है।लेकिन शहर में पत्रकार पर हो रहे अत्याचार ज़ुल्मो की आवाज बनने में शर्म आती है । अगर आप भूले ना हो। तो अभी हाल में थाना नौबस्ता द्वारा एक पत्रकार को प्रताड़ित कर झूठे मुकदमे में जेल भेजा गया। जिससे उसने परेशान हो कर अपना सुसाइड नोट सार्वजनिक वायरल कर आत्महत्या करने की कोशिश की।और इस विषय की शिकायत आत्महत्या करने से पहले (पी एम ओ,)( सी एम ओ) पोर्टल पर की फिर भी शासन , प्रशाशन पीड़ित पत्रकार को आज तक इंसाफ नहीं दिला सके।ये प्रकरण खाकी व डिजाइनर पत्रकारों के लिए अपने में बेहद शर्मनाक दंश है। और ऐसी विषम परिस्थितियों में आज हम कुछ संघर्षशील पत्रकारों ने चंदन कठेरिया को इंसाफ दिलाने के लिए व आगे कभी कोई पत्रकार बंधु अपनी आत्मा की हत्या ना कर सके। इस नजीर के साथ।और अपनी लड़ाई सही दिशा में लड़े की प्राथमिकता चलते आल जॉर्नालिस्ट्ट प्रेस काउंसिल,आइरा, कानपुर जॉर्नालिस्ट प्रेस क्लब, यू पी मीडिया क्लब ,श्रमजीवी पत्रकार संगठन, नेशनल मीडिया क्लब व हमारी आवाज फाउंडेशन के तत्वाधान में एक प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने अपर पुलिस महानिदेशक कानपुर नगर को आज पीड़ित पत्रकार के साथ ज्ञापन सौंपा की पीड़ित पत्रकार की जांच में पारदर्शिता व न्यायाओचित व्यवहार किया जाए ।चूंकि कानून और सजा सब के लिए एक है।लोक छाया.विश्वकर्मा न्यूज़ एजेंसी

Categorized in : All News उत्तर प्रदेश देश