जब सरकारें दमन पर उतरती हैं तो उनकी देवताई का दुपट्टा हवा में उड़ जाता है। हरियाणा में महारैली के लिए मंडी जा किसानों को रोकने के लिए धारा १४४ लगा दी गयी। किसान अड़े हुए थे। पुलिस की सख्ती के बावजूद किसान मंडी की ओर बढ़ते आ रहे थे। तभी शुरू हुआ धरती पुत्रो पर बेहिसाब लाठियां चटकाने का दौर।

हरियाणा के कुरुक्षेत्र से पीपली अनाजमंडी पँहुच रहे किसानों पर हुए इस बर्बर लाठीचार्ज को इतिहास खट्टर नाम के साथ सदैव याद रखेगा। मैंने माजरा पता किया तो निम्नानुसार बात संज्ञान में आई है।

कहना है कि केंद्र सरकार के एकसाथ तीन अध्यादेश प्रकाश में आये है- १) अब व्यापारी मंडी से बाहर भी किसानों की फसल खरीद सकेंगे। मतलब सम्भव है कि अब मंडियों का काम खत्म, किसानों की फसलों के दाम तय करने का काम भी तमाम, किसानों की उपज और कमाई की जिम्मेदारी का हिसाब रखने से छुट्टी।

२) दाल, आलू, प्याज, अनाज बल्कि खाने के तेल जैसी चीजों को खाने के आवश्यक होने की सूची से बाहर कर दिया। मतलब सम्भव है कि कितना भी खरीदो, कितना भी रक्खो सरकार कुछ नही पूछेगी, किसानों से सस्ते में खरीदो, खूब जमाखोरी करो, नकली कमी पैदा करो और मोटे दाम पर बेंचो।

३)कांट्रेक्ट फार्मिंग की नीति पर भी काम शुरू है। मतलब सम्भव है कि उद्योगपति किसानों की जमीन पट्टे पर लें और उन्ही किसानों से मजदूरी करवाये।

विदेशो की नकल करते समय वहां की परिस्थितियां, वहां के लोगो की मानसिकता, प्रति व्यक्ति आय, सामाजिक और आपराधिक परिवेश पर भी नजर डाल लेते तो पता लग जाता कि ये भारत है होनोलूलू नही।

-निखिलेश मिश्रा (स्वतंत्र लेखक)

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