जुलाई 2020 को प्रयागराज के सरायइनायत पुलिस थाने में आठ माह की गर्भवती महिला अपने मामा के खिलाफ शिकायत करने जाती है तो और उसके पत्रकार पति और उसके साथी को थाने में बंद करके पीटा जाता है,और इसी मामले पर प्रश्न पूछने पर उत्तर प्रदेश के यशस्वी उपमुख्यमंत्री श्री केशवप्रसाद मौर्य जी द्वारा यह जवाब दिया जाता है,जो आप सुन रहे हैं।

पत्रकार अजय विश्वकर्मा की पत्नी सरिता विश्वकर्मा के द्वारा सोमवार को मुख्यमंत्री को दिये गये पत्र के अनुसार सराय इनायत थाने के थाना अध्यक्ष संजय द्विवेदी , आकाश कुमार राय और कौशलेंद्र द्विवेदी के द्वारा सरिता विश्वकर्मा के पति को बेल्ट व डंडे से पीटा जाता है और सरिता विश्वकर्मा ने जब बचाने का प्रयास किया तो तीनों ने मिलकर आठ माह की गर्भवती सरिता विश्वकर्मा को भी सीने और पेट पर बेरहमी के साथ मारा और वह जमीन पर गिर गई और उस महिला के वस्त्र तक फट गए और उसके कई अंग निर्वस्त्र हो गए परंतु यह लोग बेशर्मी की पराकाष्ठा को पार कर उसके पति और उसके पति के साथी इरफान पत्रकार पर अपनी बहादुरी दिखाते रहे, और बाद में दोनों का चालान कर दिया गया और शाम को प्रयागराज पुलिस के सोशल मीडिया सेल से एक पत्र जारी किया गया जिसमें दोनों पत्रकारों की आपसी मारपीट बताई गई।और बताया गया कि चोटें आपसी मारपीट के कारण ही आई हैं।

जब कि दोनों मित्र हैं और आज भी साथ हैं। पुलिस द्वारा मारपीट की घटना के दूसरे ही दिन प्रयागराज के मीडिया हब के वरिष्ठ पत्रकार Birendra Singh के नेतृत्व में पत्रकार समुदाय प्रयागराज के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिषेक दीक्षित से मुलाकात करता है तो उनके द्वारा मामले की जांच फूलपुर क्षेत्राधिकारी को सौंप जाती है परंतु फूलपुर क्षेत्राधिकारी के द्वारा मामले में लीपापोती इस क़दर की जाती है और पत्रकार के जो साथी मौके पर उपस्थित थे उनका बयान तक दर्ज नहीं किया जाता है । और जब आई जी कवींद्र प्रताप सिंह के कार्यालय में प्रार्थना पत्र से भी कोई कार्यवाही नहीं की जाती है तब पत्रकार साथी जनप्रतिनिधियों की पास जाना शुरु करते हैं इसी कड़ी में सोरांव विधानसभा के विधायक और अपना दल के प्रदेश अध्यक्ष जमुना प्रसाद सरोज प्रयागराज के मंडलायुक्त आर रमेश कुमार के नाम पत्र लिखते हैं और मामले की मजिस्ट्रेटी जांच कराए जाने के लिए कहते हैं परंतु कमिश्नर साहब उस पत्र को उठाकर जिला अधिकारी कार्यालय भेज देते हैं और जिला अधिकारी महोदय उस पत्र को उठाकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के यहां भेज देते हैं और मामला रफा-दफा हो जाता है। इसी बीच प्रयागराज के एक वरिष्ठ पत्रकार उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या से बात करते हैं और मामले से अवगत कराते हैं,तब पता चलता है कि एस एस पी साहब के द्वारा बताया गया है कि दो पत्रकारों का आपसी विवाद था, जिन्होंने आपस में मारपीट की थी और दोनों का चालान भी किया गया था। इसी कारण से हमने उप मुख्यमंत्री महोदय से यह प्रश्न पूछा था कि सराय इनायत में जो पत्रकार पीटे गए हैं उनके साथ कैसे न्याय होगा ,क्योंकि एक जनप्रतिनिधि विधायक और एक राजनीतिक दल के प्रदेश अध्यक्ष के पत्र को जब टेबल टू टेबल घुमाया जा रहा हो और ऊपर से प्रदेश के उपमुख्यमंत्री का बर्ताव किसी मामले पर इस तरह से हो तो यह उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था को दर्शाने के लिए पर्याप्त है।

जब माननीय उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य जी ने हम से पत्रकारिता छोड़कर राजनीति में आने की बात कही तब हमें वह बात याद आ गई की राजनीति में हिस्सा न लेने के कारण सबसे बड़ा दंड ये मिलता है कि अयोग्य व्यक्ति आप पर शासन करने लगते हैं।

परंतु सोमवार को जब इसी मामले पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मैंने मुलाकात की और उन्होंने हर संभव कार्यवाही का आश्वासन दिया और कहा कि यदि आप प्रयागराज से लखनऊ तक आए हैं और इस आशा के साथ आए हैं कि आप को न्याय मिलेगा तो आप न्याय अवश्य मिलेगा । तो मेरी समझ में यही आया कि आप गुणा, गणित और कूटनीति से पद तो पा सकते हैं परंतु राजा बनने के लिए जो योग्यता होनी चाहिए वह योग्यता सब में नहीं आ पाती।

सौरभ सिंह सोमवंशी पत्रकार

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