विषय अंतर्गत निवेदन है कि संचालक चिकित्सा सेवाएं द्वारा समस्त जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को लिखे हुए पत्र के संबंध में कुछ भ्रांतियां और विरोधाभास हैं कृपया इन्हें शासन स्तर पर स्पष्ट निर्देश देने हेतु आदेशित करें बिंदु 1 और बिंदु 3 आपस में विरोधाभासी है, जहां पर शासन द्वारा चिन्हित अस्पतालों में ही कोविड- संक्रमित मरीजों के इलाज की व्यवस्था करने को कहा गया है , परंतु बिंदु 2 और बिंदु 3 यह कहता है कि सभी निजी चिकित्सालय में कोविड-19 साथ अन्य बीमारी का इलाज करना आवश्यक होगा इस बिंदु के निर्देश से निष्कर्ष निकलता है कि जिन निजी अस्पतालों में अन्य बीमारियों के उपचार के साथ जांच के दौरान यदि मरीज को कोरोना संक्रमण पाया जाता है तो उनका इलाज उसी गैर कोविड- अस्पताल में जारी निर्देशानुसार रखना होगा पत्र के जारी होने के बाद यह देखा गया है कि पर्याप्त संवाद और सहमति के बाद भी सरकारी अस्पतालों में मरीज को कई घंटों इंतजार करना पड़ता है कृपया केंद्र सरकार और इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च की गाइड लाइन के अनुसार चिन्हित कोविड- और नॉन कोविड- अस्पतालों की तय सीमा रेखा का पालन किया जाए ताकि मरीजों को आपस में संक्रमण से मिलने में रोका जा सके.
2.सचिव स्वास्थ्य सेवाएं छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जारी दिशानिर्देश के अनुसार छत्तीसगढ़ के सभी निजी अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों का कोरोना टेस्ट कराना जरूरी किया गया है ,ऐसी स्थिति में रायपुर को छोड़कर अन्य शहरों में प्राइवेट टेस्टिंग लैब की सुविधा नहीं है इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च द्वारा अनुमति प्राप्त टेस्ट लैब के कलेक्शन केंद्र बिलासपुर ,दुर्ग, भिलाई ,राजनंदगांव, कांकेर ,धमतरी जैसे शहरों में खोलना जरूरी हो गया है ताकि वहां से कलेक्शन किए हुए सैंपल रायपुर लाया जा सके और मरीजों को प्राइवेट स्तर पर भी सुविधा प्रदान की जा सके ऐसे में सरकारी अस्पतालों के टेस्ट केंद्र पर मरीजों की संख्या और भार को कम किया जा सकेगा।3.कृपया स्थिति स्पष्ट करें कि निजी अस्पतालों में सामान्य रूप से मरीजों की भर्ती और शल्य क्रिया की जाय या नहीं, अगर अनुमति है तो कौन सी कोरोना जाँच करायी जाय।
संपदिकया डेस्क
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