डॉ0वी0के0सिंह। (वरिष्ठ पत्रकार)
उत्तर प्रदेश। कानपुर दिनाँक 2, 3 जुलाई 2020 की रात एक क्षेत्राधिकारी, 2 उपनिरीक्षकों एव 6 पुलिस कर्मियों समेत कुल 8 लोगों की निर्मम हत्या करने वाला विकास दुबे, राजनीतिक हस्तियों एव पुलिस की दया दृष्टि से, पुलिस की अपराधिक फाइलों में मात्र एक अपराधी के रूप में दर्ज है जबकि, विकास दुबे के आपराधिक कार्य कभी सामान्य अपराधी जैसे कभी नहीं रहे बल्कि, उच्च स्तरीय आतंकियों जैसे ही रहे हैं। विकास दुबे के द्वारा सन 2001 में, शिवली थाने में घुसकर, लगभग 25 पुलिस कर्मियों की मौजूदगी में राज्य मंत्री संतोष शुक्ला को गोलियों से भून दिया गया किन्तु, थाने में मौजूद थानेदार समेत सभी पुरुष पुलिस कर्मी पुरुषार्थ का परित्याग कर होंठों पर, लिपस्टिक सजाते रहे और कदाचित पैरों में रिश्वत के घुँघरू भी बाँध कर नाचने की तैयारी करने में लगे रहे। इतना ही नहीं, विकास दुबे पर, राज्य मंत्री की हत्या में चल रहे वाद में, 25 में से एक भी पुलिस कर्मी, न्यायालय में गवाही देने की साहस नहीं कर सका कदाचित, प्रत्यक्षदर्शी पुलिस कर्मी, भली भाँति परिचित थे कि, विकास दुबे के विरुद्ध गवाही देने से सीधा अभिप्रायः है, भृष्ट न्यायतंत्र में परिवार सहित आत्म हत्या करना। चूँकि, सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, विकास दुबे के विरुद्ध कानपुर एव कदाचित राज्य के अन्य थानों में 60 संगीन अपराधों में अभियोग पंजीकृत थे फिर भी, वह तमाम राजनीतिक दलों एव पुलिस के कई आला अधिकारियों को इच्छित वरदान देने वाली किसी कामधेनु से कम न था, बात अलग है कि, विकास दुबे का नाटकीय अंदाज में, म0प्र0 की उज्जैन पुलिस के हाँथों गिरफ्तार होना, या मर्जी के मुताबिक सफलता पूर्वक आत्मसमर्पण होने की पटकथा भी, निश्चय ही किसी राजनीति के विद्वान या फिर कानून के रखवाले किसी आईपीएस के द्वारा ही लिखी गयी होगी, या संभव है खाकी एव खादी दोनों ने मिलकर लिखी हो। आज भले ही उत्तर प्रदेश सरकार के भाजपा नेता शेखी बघार रहे हो किन्तु, इस सत्य को झुठला नहीं सकते कि, उनकी पुलिस माफियाओं, गुण्डों एव बदमाशों के द्वारा फेके हुये जूँठे टुकड़े के बल पर ही जीवित है वर्ना पुलिस की नाकाबंदी फेल नहीं होती, चूँकि विकास दुबे ने इतने बड़े हत्याकाण्ड को अंजाम देने के बाद, कोई हवाई यात्रा नहीं की बल्कि, पुलिस की चाक चौबंद चौकसी एव सतर्कता के चलते, कानपुर से दिल्ली, फरीदाबाद(हरियाणा) राजिस्थान होते हुये म0प्र0 के उज्जैन तक सफर किया किन्तु, रिश्वतखोर पुलिस की धुँधली आँखे विकास को नहीं पहचान सकीं, उसे मन्दिर में फूल बेंचने वाले ने पहचाना तथा मंदिर के सिक्योरिटी गार्ड ने पकड़ा। विकास दुबे एनकाउन्टर। आज दिनाँक 10 जुलाई 2020 की प्रातः कालीन, कानपुर की सीमा में प्रवेश करते ही थाना संचेंडी क्षेत्र अंतर्गत, भौंती में पुलिस मुठभेड़ में 8 पुलिस कर्मियों की निर्मम हत्या करने वाला विकास दुबे मारा गया, उक्त कथन उत्तर प्रदेश पुलिस के उन जांबाज अधिकारियों का है, जिनके थानों में घुसकर विकास दुबे राज्य मंत्री संतोष शुक्ला की हत्या कर बा-इज्जत न्यायालय से बरी हो जाता है, और थाने के वर्दीधारी सिपाही से लेकर अधिकारी तक, बंदूक उठाकर सामना करने के बजाय अपनी पत्नियों के पल्लुओं चेहरा छुपा लेते हैं, और एक भी पुलिस कर्मी न्यायालय में विकास दुबे के विरुद्ध गवाही देने नहीं आता है। इतना ही नहीं, उज्जैन में पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद, इतने खूंखार आतंकी समान अपराधी को, रोड द्वारा लाने से सीधे अभिप्रायः विकास दुबे को मारकर, विकास के सफेदपोश राजनीतिक संरक्षकों एव खाकी वर्दी में छुपे विकास दुबे से ज्यादा खतरनाक अपराधियों को बचाना ही था। बहराल, दुर्दान्त आतंकी समान अपराधी विकास दुबे मारा गया किन्तु, अपनी मौत के पीछे कई अनसुलझे प्रश्रचिन्ह छोड़ गया।
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