जापान ने चीन से कारोबार समेटने वाली अपनी कंपनियों के लिए आर्थिक पैकेज का ऐलान करके चीन के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक नाकेबन्दी का बिगुल बजा दिया है । जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने इस हफ्ते की शुरुआत में , चीन में निर्माण गतिविधियां चलाने वाली जापानी कंपनियों को वहां से अपना बोरिया बिस्तर समेट कर जापान में उत्पादन शुरू करने के लिए 200 करोड़ डॉलर अर्थात लगभग 15 हजार करोड़ रुपये का फंड दिया है । जापान ने चीन से बाहर किसी अन्य देश मे जाकर उत्पादन करने पर उन जापानी कंपनियों को 21.5 करोड़ डॉलर की मदद का प्रस्ताव रखा है । अमरीका ,जर्मनी सहित दुनिया भर की सरकारें इस जापानी मॉडल को अपनाने पर गंभीरता से विचार कर सकती हैं । वैसे भी कोविड-19 संकट से युद्ध लड़ रहे देश चीन पर अपनी निर्भरता घटाने की बात सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं ,इसका मतलब साफ है कि कोरोना के बाद दुनिया आज जैसी नहीं रह जायेगी । आर्थिक-सामरिक ताकतों के केंद्र भी निश्चित रूप से बदलेंगे । बीती 30 मार्च को इसी स्थान पर ‘ अभूतपूर्व संकट में छिपी उज्ज्वल संभावनाएं ‘ शीर्षक के तहत मैंने विस्तार से लिखा था कि कोरोना संकट भारत के पुनर्निर्माण के लिए अनुपम अवसर की भांति उज्ज्वल भविष्य की असीम संभावनाएं छिपाए हुए है जिसे सरकार उदार और लचीली नीति तथा कुशल प्रबंधन के इस्तेमाल से भारत के नवनिर्माण या पुननिर्माण का बेहतरीन जरिया बना सकती है – विस्तार भारत के लिए सुनहरा अवसर

Naresh sharma आर्थिक विवेचक Vyaparsandesh.page

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