अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट जाँजगीर चाँपा — देश भर में महासंग्राम मचाये कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के लिये इन दिनों स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी अपनी जान की परवाह ना करते हुये पूरी ईमानदारी के साथ शहर और गांव के घर घर में घूमकर कम वेतनमान में भी अपनी ड्यूटी बखूबी से निभा रहे हैं। गौरतलब है कि इस समय पूरा देश कोरोना वायरस से भयभीत है और ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक महिला पुरुष कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ते हुये दूसरे राज्य से आये मरीजों को घर-घर भ्रमण कर लाइन लिस्टिंग तैयार करने में अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं। किसी भी प्रकार का रोग होने पर प्राथमिक पहचान एवं ईलाज इन्हीं के भरोसे रहता है और इन्हीं के सहारे शासन का कार्य एवं लक्ष्य मंजिल तक पहुंँचता है। ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजकों के द्वारा ही नसबंदी , गर्भनिरोधक के साधन , मोतियाबिंद , एएमसी जांँच , पीएनसी जांँच , मलेरिया स्लाइड , टीवी स्लाइड , संस्थागत प्रसव , फाईलेरिया , कृमि मुक्ति , एनीमिया मुक्ति , टीकाकरण जैसे 16 राष्ट्रीय कार्यक्रमों का संचालन किया जाता है जबकि इन्हीं का मानदेय कम है। अन्य कैडर के कर्मचारी एक ही जगह बैठकर कार्य संचालित करते हैं जबकि ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक पाँच हजार से दस हजार जनसंख्या के बीच कार्य करते हैं। इनका कार्य अन्य की अपेक्षा अधिक कठिन होता है। इन लोगों के द्वारा पूर्व में भी मानदेय बढ़ाने के नाम पर हड़ताल किया गया था लेकिन इनको आश्वासन के अलावा अभी तक कुछ भी नहीं मिला है राज्य सरकार को इनकी मांगों पर विचार विमर्श करते हुये कोरोना वायरस की रोकथाम में लगे इन कर्मचारियों के मानदेय में वृद्धि किये जाने की अति आवश्यकता है ताकि हमारी समाज को इन कर्मचारियों की सतत सेवा मिलती रहे।
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