महाराज की जयंती अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट नागौर — कामधेनु सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रवण सैन के नेतृत्व में नागौर तहसील अध्यक्ष राजुराम काला ने कामधेनु सेना राष्ट्रीय कार्यालय में परम पराक्रमी छत्रपति शिवाजी महाराज के चित्रपट्ट पर तिलक करते हुये पुष्पमाला पहनाकर शिवाजी महाराज की जयंती मनाई। इस अवसर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष सैन ने कहा कि छत्रपती शिवाजी महाराज भारत के एक महान राजा एवं रणनीतिकार थे जिन्होंने पश्चिम भारत में मराठा साम्राज्य की नींव रखी। उन्होंने कई वर्ष औरंगजेब के मुगल साम्राज्य से संघर्ष किया। रायगढ़ में उनका राज्यभिषेक हुआ और वह ‘छत्रपति’ बने। छत्रपती शिवाजी महाराज ने अपनी अनुशासित सेना एवं सुसंगठित प्रशासनिक इकाईयों कि सहायता से एक योग्य एवं प्रगतिशील प्रशासन प्रदान किया। उन्होंने समर-विद्या में अनेक नवाचार किये तथा छापामार युद्ध की नयी शैली (शिवसूत्र) विकसित की। उन्होंने प्राचीन हिन्दू राजनीतिक प्रथाओं तथा दरबारी शिष्टाचारों को पुनर्जीवित किया और फारसी के स्थान पर मराठी एवं संस्कृत को राजकाज की भाषा बनाया। भारत के स्वतन्त्रता संग्राम में बहुत से लोगों ने छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवनचरित से प्रेरणा लेकर भारत की स्वतन्त्रता के लिये अपना तन, मन, धन न्यौछावर कर दिया। तहसील अध्यक्ष राजुराम काला ने बताया कि छत्रपति शिवाजी भारत के बहादुर शासकों में से एक थे। छत्रपति शिवाजी का जन्म 19 फरवरी 1630 को शिवनेरी दुर्ग में हुआ था। मराठा साम्राज्य की नींव रखने का श्रेय छत्रपति शिवाजी को जाता है। छत्रपति शिवाजी की जयंती को शिव जयंती और शिवाजी जयंती भी कहते हैं। महाराष्ट्र में शिवाजी जयंती पारंपरिक तरीके से मनाई जाती है। महाराष्ट्र में इस दिन सार्वजनिक अवकाश होता है। शिवाजी को उनकी बहादुरी और रणनीतियों के लिए जाना जाता है, जिससे उन्होंने मुगलों के खिलाफ कई युद्धों को जीता। छत्रपति शिवाजी स्वराज और मराठा विरासत के लिये जाना जाता है। कई लोग मानते हैं कि शिवाजी का जन्म भगवान शिव के नाम पर रखा गया, लेकिन ऐसा नहीं था, उनका नाम एक देवी शिवई के नाम पर रखा गया था। दरअसल शिवाजी की मां ने देवी शिवई की पुत्र प्राप्ति के लिए पूजा की और उन्हीं पर शिवाजी का नाम रखा गया। शिवाजी ने मराठाओं की युद्द कौशल जैसे गुरिल्ला युद्ध सिखाये। उन्होंने मराठाओं की एक बहुत बड़ी सेना बनाई। शिवाजी हर धर्म के लोगों को मानते थे। उनकी सेना में कई मुस्लिम सिपाही भी थे। उनका मुख्य लक्ष्य मुगल सेना को हराकर मराठा साम्राज्य स्थापित करना था। शिवाजी महिलाओं को भी सम्मान करते थे। उन्होंने महिलाओं के खिलाफ होने वाली कई हिंसाओ, शोषण और अपमान का विरोध किया। महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन करने पर उनके राज्य में सजा मिलती थी। इस मौके पर कामधेनु सेना के कामधेनु सेना के राश्ट्रीय महासचिव दिपेन्द्र सिंह राठौड़, मध्यप्रदेषाध्यक्ष श्रवणपुरी गोस्वामी, सीताराम पारीक, उगराराम भाम्बू, श्रवण, प्रेमाराम, रोहितास सुथार, रामरत्न चैधरी, सोनु गढ़वाल, दिनेष, रामकिशोर, ओमप्रकाश सहित बड़ी संख्या में गो सैनिक उपस्थित थें।

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