संवाददाता इंद्रपाल सिंह अमर सिंह कश्यप की रिपोर्ट
ग्रामीणों को बताएं वैज्ञानिक खेती के तरीके और पारंपरिक खेती के तरीकों से रूबरू हुए छात्र छात्राएं
ग्राम पंचायत भगवानपुर जुलों छरबा और कासवाली कोठरी मैं अल्पाइन ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूट नंदा की चौकी प्रेम नगर के छात्र-छात्राओं द्वारा रूरल एग्रीकल्चर वर्क एक्सपीरियंस प्रोग्राम रावे के तहत ग्रामीण किसानों से बातचीत करके पारंपरिक खेती के तरीकों को जाना और उन्हें वैज्ञानिक तरीकों से खेती करने के बारे में जानकारी दी छात्र-छात्राओं द्वारा बताया गया कि उनके द्वारा पढ़ाई के दौरान सीखें गए खेती के कार्य में जैविक खेती को प्रोत्साहन दिया गया है क्योंकि रासायनिक खेती से मानव मात्र को बहुत सी बीमारियों का सामना हो रहा है ऐसे में ऑर्गेनिक खेती ही मानव मात्र की रक्षा कर सकती है उन्होंने किसानों से कहा कि वह ऑर्गेनिक खेती की ओर अग्रसर हूं और रासायनिक तथा कीटनाशकों का प्रयोग अपनी खेती में ना करें छरबा के ग्राम प्रधान आमिर खान ने कहा कि आज का युवा ऑर्गेनिक खेती के लिए किसानों को प्रेरित कर रहा है मैं उनके इंस्टीट्यूट और छात्रों को बधाई देता हूं भगवानपुर जुलो के ग्राम प्रधान दिनेश जोशी ने कहा कि हमारे गांव में पानी की दिक्कत है सिर्फ नहर से पानी लेकर सिंचाई की जाती है और छात्रों के द्वारा गांव में बने गोबर गैस संयंत्र तथा अन्य पारंपरिक तरीकों का भी अवलोकन किया गया इसी प्रकार डूगा गांव में रूरल सर्वे के दौरान छात्रों ने किसानों से बहुत से सवाल पूछे और उन्हें अपने अंतिम सेमेस्टर की जानकारी के तौर पर अपने पास सहेज कर रखा ग्राम प्रधान प्रियंका गुलेरिया ने सभी बच्चों छात्रों का अपनी ग्राम सभा में स्वागत किया और छात्रों को उनके गांव में आकर सर्वे करने के लिए उन्हें बधाई दी और कहा कि इसके चलते उनके गांव के किसान जागरूक हो रहे हैं और किसानों को नई योजनाओं की जानकारी मिल रही है उन्होंने भी छात्रों का और अल्पाइन ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूट का धन्यवाद किया इस अवसर पर यूनी फायर कृषि प्रशिक्षण केंद्र तथा नई दिशा जनहित ग्रामीण विकास समिति के द्वारा भी प्रतिभाग किया गया जिसमें नई दिशा जनहित ग्रामीण विकास समिति के संस्थापक अमर सिंह कश्यप यूनीफायर के अमित उपाध्याय अर्जुन कुमार रोहित तथा समस्त छात्र-छात्राओं द्वारा प्रतिभाग किया गया इस अवसर पर किसानों के द्वारा बच्चों से छात्र छात्राओं से कई कृषि के संबंध की जानकारी हासिल की तथा अपनी ओर से पारंपरिक खेती के तरीकों से छात्र-छात्राओं को अवगत कराया जिससे छात्र-छात्राओं और किसानों के बीच परस्पर आदान-प्रदान और जनजागृति मार्ग प्रशस्त हुआ
Categorized in : उत्तराखंड