जिन्होने 1929 से 1946 तक 17 साल जेल यातना झेली 65 दिन के अनशन में डटे रहे। शादीशुदा थे, घर पर पत्नी और बेटी भी थी। फिर भी कभी झुके नही और ना ही माफी मांगी। . • 15 मई 1929 को सहारनपुर दवाखाना एवं पार्टी कार्यालय एवं बम फैक्ट्री से गिरफ्तार हुये थे | . • 15 मई से 31 मई 1929 ई. तक सहारनपुर कोतवाली (पुलिस रिमांड) • 1 जून से 10 जुलाई 1929 तक लाहौर फोर्ट हवालात . • 10 जुलाई 1929 से 7 अक्टूबर 1930 तक लाहौर बोर्सटल जेल में रहे | (यही पर लाहौर षडयंत्र केस चला और आजीवन कालापानी की सजा मिली थी ) . • 7-10-1930 से नवंबर 1930 तक लाहौर सेंट्रल जेल में रहे | • 1 दिसंबर 1930 से 31.12.1930 न्यू सेंट्रल जेल मुल्तान, (अब पकिस्तान ) में रहे | • जनवरी 1931 से अक्टूबर 1932 तक बेलारी सेंट्रल जेल (कर्नाटक) में रहे | • नवंबर 1932 से सितम्बर 1937 तक सेल्यूलर जेल, अंडमान निकोबार ( काला पानी ) में रहे | • सितम्बर 1937 से नवंबर 1937 तक दमदम सेंट्रल जेल, कलकत्ता में रहे | • दिसंबर 1937 लाहौर सेंट्रल जेल, में रहे | • जनवरी 1938, नैनी सेंट्रल जेल (इलाहबाद) में रहे | • फरवरी 1938 से जून 1942 लखनऊ सेंट्रल जेल में रहे | • जुलाई 1942 से जनवरी 1945 तक सुल्तानपुर जेल में रहे | • जनवरी 1945 से फरवरी 1946 तक कानपूर सेंट्रल जेल में रहे | • 21 फरवरी 1946 को जेल से रिहा किये गये थे | . और स्वतंत्र भारत में जेल यात्राओं का दौर .

सन् 1958 में छह माह का जेल जीवन।सन् 1964 से 1966 तक डेढ़ वर्ष का जेल जीवन। . ( यह आंकड़े डाँ गया प्रसाद जी के सुपुत्र क्रांति कुमार कटियार ने एकत्र किए हैं। ) . #ऐलानएइंकलाब

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