अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट गुवाहाटी — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नागिरकता संशोधन कानून के बाद पहली बार असम दौरे पर पहुंँचे। उनका पारंपरिक नृत्य के साथ भव्य स्वागत हुआ। आसाम में एक रैली को संबोधित करते हुये पीएम मोदी ने कहा कि ‘मैंने जीवन में कई रैलियां देखी हैं, लेकिन कभी इतना विशाल जनसागर देखने का सौभाग्य नहीं मिला। आपकी तादाद देखकर मेरा विश्वास और बढ़ गया। मैं दिल की गहराई से आपको गले लगाने आया हूं। असम मेंइतने दशकों तक यहां गोलियां चलती रहीं, आज शांति स्थापित हुई। न्यू इंडिया का रास्ता खुल गया है। शांति और विकास के नए अध्याय में आपका स्वागत करता हूं।” कभी-कभी लोग मोदी को डंडा मारने की बाते कहते हैं लेकिन जिस मोदी को इतनी बड़ी संख्या में माताओं-बहनों का सुरक्षा कवच मिला हो उस पर कितने ही डंडे गिर जायें उसको कुछ नहीं होता। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आज जो उत्साह, जो उमंग मैं आपके चेहरे पर देख रहा हूं, वो यहां के ‘आरोनाई’ और ‘डोखोना’ के रंगारंग माहौल से भी अधिक संतोष देने वाला है. आज का दिन उन हज़ारों शहीदों को याद करने का है, जिन्होंने देश के लिये अपने कर्तव्य पथ पर जीवन बलिदान किया। प्रधानमंत्री ने कहा, मैं आज असम के हर साथी को ये आश्वस्त करने आया हूं, कि असम विरोधी, देश विरोधी हर मानसिकता को, इसके समर्थकों को,देश न बर्दाश्त करेगा, न माफ करेगा. यही ताकतें हैं जो पूरी ताकत से असम और नॉर्थईस्ट में भी अफवाहें फैला रही हैं, कि CAA से यहां, बाहर के लोग आ जायेंगे, बाहर से लोग आकर बस जायेंगे। मैं आसाम के लोगों को आश्वस्त करता हूं कि ऐसा भी कुछ नहीं होगा। आज का दिन इस समझौते के लिये बहुत सकारात्मक भूमिका निभाने वाले ऑल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन, नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंड ऑफ बोडोलैंड से जुड़े तमाम युवा साथियों, BTC के चीफ श्रीहगरामामाहीलारेऔर असम सरकार की प्रतिबद्धता को अभिनंदन करने का है। आज का दिन असम सहित पूरे नॉर्थईस्ट के लिए 21वीं सदी में एक नई शुरुआत, एक नये सवेरे का, नई प्रेरणा का स्वागत करने का है. मैं न्यू इंडिया के नए संकल्पों में आप सभी का, शांतिप्रिय असम का, शांति और विकास प्रिय नॉर्थईस्ट का स्वागत करता हूं, अभिनंदन करता हूं। साथ ही उन्होंने कहा – अब असम में अनेक साथियों ने शांति और अहिंसा का मार्ग स्वीकार करने के साथ ही, लोकतंत्र को स्वीकार किया है, भारत के संविधान को स्वीकार किया है। मैं बोडो लैंड मूवमेंट का हिस्सा रहे सभी लोगों का राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल होने पर स्वागत करता हूं. पांच दशक बाद पूरे सौहार्द के साथ बोडो लैंड मूवमेंट से जुड़े हर साथी की अपेक्षाओं और आकांक्षाओं को सम्मान मिला है.।अब केंद्र सरकार, असम सरकार और बोडो आंदोलन से जुड़े संगठनों ने जिस ऐतिहासिक अकॉर्डपर सहमति जतायी है, जिस पर साइन किया है, उसके बाद अब कोई मांग नहीं बची है और अब विकास ही पहली प्राथमिकता है और आखिरी भी।
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