अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट गुवाहाटी (दिसपुर) — नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज पहली बार पूर्वोत्तर के आसाम (कोकराझार) दौरे पर रहेंगे। जहाँ वे बोड़ो समझौते को लेकर आयोजित कार्यक्रम में पीएम मोदी शिरकत करेंगे और दोपहर 12:30 बजे यहांँ एक रैली को भी संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री की यात्रा को देखते हुये यहाँ की सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गयी है। वहीं दूसरी ओर कोकराझार जिले के लोगों ने हजारों दीपक जलाकर अपनी खुशियों का इजहार किया है। बीटीएडी (बोडोलैंड टेरिटोरियल एरिया डिस्ट्रिक्स) जिलों- कोकराझार, बक्सा, उदलगुड़ी और चिरांग सहित पूरे आसाम के चार लाख से अधिक लोगों के इस कार्यक्रम में भाग लेने की संभावना है। इसमें राज्य के जातीय समूहों का सांस्कृतिक कार्यक्रम भी शामिल है। बोडो शांति समझौते और पीएम मोदी के स्वागत में असम के कोकराझार जिले में लोगों ने करीब 70 हजार दीयों को जलाकर अपनी खुशियों का इजहार किया। गौरतलब है कि 27 जनवरी को गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में बोड़ो समझौता पर हस्ताक्षर किया गया था। इस समझौते के अनुसार नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) के विभिन्न गुटों के लगभग 1615 कैडरों ने अपने हथियार डाल दिये और समझौते पर हस्ताक्षर होने के दो दिनों के भीतर मुख्यधारा में शामिल हो गये। इस समझौते के तहत क्षेत्र के विकास के लिये लगभग 1500 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज रखा गया है।

बोडो क्या है ??

बोडो आसाम का सबसे बड़ा आदिवासी समुदाय है जो राज्य की कुल जनसंख्या का 5 से 6 प्रतिशत है। लंबे समय तक असम के बड़े हिस्से पर बोडो आदिवासियों का नियंत्रण रहा है। आसाम के चार जिलों कोकराझार, बाक्सा, उदालगुरी और चिरांग को मिलाकर बोडो टेरिटोरिअल एरिया डिस्ट्रिक्ट का गठन किया गया है। बोडो लोगों ने वर्ष 1966-67 में राजनीतिक समूह प्लेन्स ट्राइबल काउंसिल ऑफ असम के बैनर तले अलग राज्य बोडोलैंड बनाये जाने की मांग की। यह विरोध इतना बढ़ गया कि केंद्र सरकार ने गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) कानून, 1967 के तहत एनडीएफबी को गैर कानूनी घोषित कर दिया। वर्ष 1987 में ऑल बोडो स्टूडेंट यूनियन ने एक बार फिर से बोडोलैंड बनाये जाने की मांग की। दरअसल यह विवाद असम आंदोलन (1979-85) का परिणाम था जो आसाम समझौते के बाद शुरू हुआ। आसाम समझौते में आसाम के लोगों के हितों के संरक्षण की बात कही गई थी।

क्यों महत्वपूर्ण है 2020 बोडो समझौता?

समझौते के तहत उग्रवादी संगठन नेशनल डेमोक्रैटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड  के 1615 कैडर को 30 जनवरी को आत्मसमर्पण कर अपने हथियार सौंपने थे । इस दौरान कई उग्रवादी संगठन देश की मुख्याधारा में शामिल हो गये अब उनके कैडर का पुनर्वास किया जायेगा। इसके तहत बोडो क्षेत्रों के विकास के लिये तीन वर्षों में 1500 करोड़ रुपये का विकास पैकेज मिलेगा, जिससे विशिष्ट परियोजनाओं का आने वाले समय में क्रियान्वयन होगा। इस समझौते से बोडो टेरिटोरियल काउंसिल के क्षेत्र और शक्तियों का विस्तार होगा।

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