जनवरी 2019 से अबतक एक साल में डॉलर के मुकाबले रुपये में करीब दो फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। सिर्फ 2019 में ही नहीं, बल्कि साल 2018 में भी रुपये की यही स्थिति थी। साल 2018 में एक साल रुपया 8 फीसदी कमजोर हुआ था। वहीं पिछले पांच कैलेंडर वर्ष में से चार में डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत कम हुई है और पिछले 10 सालों में ऐसा आठ बार हुआ है।

बता दें कि एक साल में रुपया डॉलर के मुकाबले एशिया की तीसरी सबसे कमजोर करेंसी साबित हुआ है। सिर्फ पाकिस्तान और दक्षिण कोरिया की मुद्राओं से ही भारतीय रुपया बेहतर है।  इन देशों की करंसी में आई गिरावट डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपया सबसे अधिक यानी 9.5 फीसदी गिरा है, दक्षिण कोरिया के वॉन में 4.8 फीसदी की गिरावट आई है, बांग्लादेश के टका में 1.5 फीसदी, चीन के युआन में 0.4 फीसदी। इन देशों की करंसी में आई बढ़त वहीं डॉलर के मुकाबले थाईलेंड की बाथ करेंसी सबसे अधिक यानी 6.3 फीसदी मजबूत हुई है। मलयेशिया के रिंगिट में 1.5 फीसदी की मजबूती आई है, फिलिपींस के पेसो में तीन फीसदी की बढ़त आई और इंडोनेशिया के रुपिया में 5.3 फीसदी की मजबूती आई है।

इक्विनॉमिक्स रिसर्च एंड एडवाइजरी सर्विसेज के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर सी चोकलिंगम ने बताया कि, ‘साल 2019 सितंबर में कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती के बाद देश में कैपिटल इनफ्लो बढ़ा है। इससे शेयर बाजारों में भी तेजी देखने को मिली। 2019 में देश के इक्विटी और डेट मार्केट में करीब 2000 करोड़ की विदेशी पूंजी आई है।’

बीते एक साल में वियतनाम के डोंग में डॉलर के मुकाबले कोई बदलाव नहीं आया है।

भारतीय अर्थव्यवस्था में गिरावट और बढ़ती मुद्रास्फीति की वजह से भारतीय रुपया कमजोर हुआ है। पिछले एक साल में भारतीय रुपया एशिया की सबसे कमजोर मुद्राओं में से एक बन गया है। अब रुपये की हालत सिर्फ पाकिस्तान और दक्षिण कोरिया की मुद्राओं से ही बेहतर है।

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