हां मैं भ्रष्टाचार हूं मुझे अपने आप में गर्ब में है। क्यों न गर्ब करूं आज सभी तो मेरे इर्द गिर्द घूमते हैं अलग अलग नामों से शुभोभित करते हैं हर जुबां पे मैं हूं सबका चहेता बन गया हूं मैं बिना मेरे कोई जीने की कल्पना भी नहीं कर सकता और न ही कर रहा जिधर देखो आज मैं ही मैं हूं ऊपर से लेकर नीचे तक नीचे से लेकर ऊपर तक चारों तरफ मेरा ही सम्राज्य है मैं बहुत खुश हूं मेरे सामने कोई नहीं है किसी की औकात नहीं है जो मेरा सामना कर सके।तो मैं क्यों न अंहकारी हो जाऊं आज मेरे कथन पे कुछ लोगों को भरोसा नहीं हो रहा होगा कि मेरा यानी भ्रष्टाचार का सम्राज्य स्थापित है पर मुझे इन मुठ्ठी भर लोगों की चिंता भी नहीं है यह लोग मेरा क्या बिगाड लेंगे जब एक लंबी कतारें मेरे साथ है। मैं कमीशन खोर के नाम से भी जाना जाता हूं मैं दालाल के नाम से भी जाना जाता हूं मेरे कयी रूप है कयी नाम है जिसके कार्य नहीं होते हैं तुरंत हाजिर हो दलाली का रोल अदा करता हूं कमीशन देता हूं और बैध को अबैध अबैध को बैध बना देता हूं रुकी फाइलों को बाबूओं के जबड़े से तुंरत निकाल आगे बढ़ाता हूं क्योंकी मैं भ्रष्टाचार हूं।किसी निधि से बिकास के लिए मद से कुछ निकलवाना है तो मैं कमीशनखोर भ्रष्टाचार हूं तुरंत निधि से रूपए निकलवा देता हूं। यही नहीं किसी सिरफिरे ने अगर दंखलंदाजी की यह आपको गिरफ्तार किया तो भी चिंता की बात नहीं होती यहां भी हम अपना रुतबा बरकार रखते हैं और आपको दूने सम्मान के साथ जो तुम्हें नहीं जानता होगा उससे भी परिचय करवा रथ में बिठा गाजे-बाजे के साथ महिमा मंडित करवाते हुए बाहर घर तक लायेंगे यह हमारा अपने सभी शुभचिंतकों से वादा है क्योंकी हम भ्रष्टाचार हूं।
आत्माराम त्रिपाठी लेखक प्रभार संपादकीय स्वतंत्र