अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट नागौर — मनुष्य के सबसे बड़ा दुःख का कारण माया रूपी बन्धन ही है। जब मनुष्य माँ के गर्भ में होता है तभी से माया उसको बांँध लेती है और जब-जब जीव कुछ धार्मिक कार्य करता है तो उनके पास अनेक बाधायें आती है। ये माया ही है जो भगवान के कार्यों में बाधक बनी हुई है। यह माया तब तक पीछा नही छोड़ती जब तक मायापति कृपा ना करे। उक्त बातें कामधेनु सेना के संस्थापक महामंडलेश्वर स्वामी कुशालगिरी जी महाराज के पावन सानिध्य में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन आज कथा वाचिका ममता देवी ने कही। आगे उन्होने अजामिल की कथा में बताया कि वह एक ब्राह्मण था जो शास्त्रज्ञ, शील, सदाचार, और सदगुणों में निपुण था लेकिन वह भी माया के जाल में आकर अपने धर्म से भटक गया। जीवन के कुछ सतकर्मो के कारण अन्त समय में नारायण नाम लेने से उसे भगवत प्राप्ति हुई। तत्पश्चात कथा वाचिका ने भरत-चरित्र का वृतान्त सुनाते हुये कहा कि जीवन के अंत समय में मनुष्य जिस वस्तु या जीव में अपना मन डाल देता है उस जीव की अगली जन्म उसी योनि में होती है। जिस प्रकार जड़भरत मृग के बच्चे में इतना आशक्त हो गया कि अपनी दैनिक क्रिया कर्म को छोड़ कर केवल मृग के बच्चे में ही ध्यान लगाने के कारण उनका अगला जन्म मृग योनि में हुआ। भक्त प्रहलाद-चरित्र का वर्णन करते हुये देवी जी ने कहा कि भक्त प्रहलाद को अपने पिता हिरण्याकश्यप ने केवल अपना ही नाम लेने को कहा और भगवान के नाम का विरोध किया। परन्तु प्रहलाद ने भगवान का नाम नही छोड़ा इससे क्रोधित होकर हिरण्याकश्यप ने प्रहलाद को मारने के अनेक प्रयत्न किये जैसे उसे पहाड़ों से गिराया, सांपों से डसवाया, हाथी से कुचलवाया और अन्त में होलिका के संग जलाया। परन्तु जिसका रक्षक स्वयं भगवान होते है उनका कोई कुछ भी बिगाड़ नही सकता। कथा मध्य में महामण्डलेश्वर स्वामी कुशालगिरी महाराज ने प्रवचन के दौरान स्वामी (मालिक) ओर सेवक के फर्ज को आधार बताकर इंद्र और तोते की पौराणिक कथा सुनायी। आज कथा के तृतीय दिवस पर जगदीश बिश्नोई मुख्य यजमान बनें इन्होने गोहितार्थ सुन्दर सहयोग किया। कथा के दौरान श्री गुरू चरणम् सेवा समिति के सदस्यों ने संकल्प लिया कि वे प्रत्येक शनिवार को पीड़ित गोवंश हितार्थ 2020 तक ढ़ाई लाख रूपये की लापसी बनवायेंगे साथ ही उन्होने 18 गुणा 140 फुट का टीनशेड (लागत 3लाख रू.) बनाया। दानदाता गीता देवी भाटी, (21000) भंवरलाल सोनी, संतोष परिहार (5100), अन्नाराम सुथार(3600), रास बहादुर शास्त्री (3100) सहित दर्जनों दानदाताओं ने किया गो हितार्थ सहयोग किया। सभी दानदाताओं का व्यासपीठ की ओर से स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। आज की कथा में पूज्य गोविन्दराम महाराज, गिरधारीराम महाराज, गो क्रांतीकरी संत रामेश्वरगिरी महाराज, रामसेवक दास महाराज, साध्वी ज्ञानेश्वर देवी, साध्वी हर्षिता विशेष रूप से उपस्थित रहे और उनका भी गोहितार्थ प्रवचन हुआ। ट्रस्ट की तरफ से श्रद्धालुओं को उपहार स्वरूप कामधेनु दर्शन पुस्तक वितरित की गयी ताकि भक्तों में गौमाता के प्रति श्रद्धा भाव उत्पन्न हो। आज भगवान नरसिंह अवतार की झाँकी ने सभी का मन मोह लिया।