अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट प्रयागराज — बाबरी मस्जिद निर्माण के लिये पाँच एकड़ जमीन तो दूर पूरे भारत की सीमा में एक इंच भी जमीन नहीं दिया जाना चाहिये। भारत ने हमेशा उदारता का परिचय दिया है। हमारे देश में हमेशा से अतिथि देवा भव: की परंपरा रही है। इसी वजह से हमारी संस्कृति ने हमेशा शरणार्थियों का भी आदर किया है। भारत , नेपाल और भूटान को हिंदू राष्ट्र घोषित करने हेतु विश्व स्तर पर जोर देने की महती आवश्यकता है। संयुक्त राष्ट्र में इस आशय का प्रस्ताव लाया जाना चाहिये। इसी तरह हमारे देश में घूम रहे नकली शंकराचार्य के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जानी चाहिये।माघ मेला त्रिवेणी मार्ग स्थित अपने शिविर में पुरी शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने पत्रकारों से चर्चा के दौरान रामजन्मभूमि विवाद पर आये सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर असहमति जताते हुये कहा कि धार्मिक एवं आध्यात्मिक मामलों में शंकराचार्य का फैसला किसी भी कोर्ट से ऊपर है। नागरिकता संशोधन कानून पर उन्होंने कहा कि पूरे विश्व में 204 देशों में 50 से अधिक मुस्लिम तंत्र से संबंध है और उससे भी ज्यादा क्रिश्चियन से संबद्ध है लेकिन हिंदू राष्ट्र के रूप में विश्व में एक भी देश नहीं है। जैन , बौद्ध , सिख भी हिंदू धर्म का ही हिस्सा है उनकी मान्यताओं एवं लक्षणों में हिंदू धर्म का प्रतिबिंब दिखाई पड़ता है इन्हें अल्पसंख्यक का दर्जा देने की बजाय हिंदू धर्म का हिस्सा मानना चाहिये। देश भर में घूम रहे नकली शंकराचार्य के बारे में पूछे जाने पर महाराज श्री ने कहा कि सरकार को अनाधिकृत शंकराचार्य लिखने वालों को मृत्युदंड , कारावास या देश से बाहर करने की सजा देनी चाहिये। उन्होंने नकली शंकराचार्य के प्रश्न पर राजनेताओं पर कटाक्ष करते हुये कहा कि सोनिया गांधी और लालकृष्ण आडवाणी के दामाद को तो जेल में डाला जा सकता है लेकिन यह बड़ी दुर्भाग्य की बात है कि नकली शंकराचार्य के खिलाफ कार्यवाही करने की बजाय सरकार उन्हें संरक्षण देती है और उन्हें कुंभ एवं माघ मेले में भूमि व सरकारी सुविधायें भी प्रदान करती है। महाराज श्री ने डंके की चोट कहा कि चीन लाखों कोशिश के बावजूद नकली दलाईलामा नहीं बना पाया और हमारे यहांँ दागी छवि के लोग सरकार के संरक्षण में नकली शंकराचार्य बनकर घूम रहे हैं। महाराजश्री ने आगे कहा कि किसी को भी मानवता की धज्जी उड़ाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिये। भारत ने उदारता का परिचय देते हुये तीन मुसलमानों को राष्ट्रपति बनाया। गृहमंत्री, शिक्षामंत्री व मुख्य न्यायाधीश जैसे पदों पर भी मुसलमान रहे हैं। अभी केरल के राज्यपाल मुस्लिम ही हैं। क्या इस तरह की उदारता का परिचय देते हुये किसी मुस्लिम देश में हिंदू को ऐसा ओहदा दिया जा सकता है ? इस पर भी विचार करने की आवश्यकता है। उन्होंने चेताया कि हिंदुओं की उदारता को दुर्बलता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिये।
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