![] यही मुक्तिपथ है। शिवाजी महाराज और गुरू गोविन्द सिंह जी महाराज दो ऐसे महावीर महानायक हमारे समाज को एक ही कालखंड मे मिले। उस समय, जब देश हताशा और निराशा के घोर अंधकार मे डूबा हुआ था; हर कोई बस स्वार्थसाध्दि मे लगा हुआ था। ऐसी निराशाजनक स्थिति में, इन दोनों महापुरुषों का प्राकट्य इस देश का सौभाग्य था। इन महामानवों के पवित्र संकल्पों से ही इस देश मे नवऊर्जा का संचार हुआ।
जहाँ गोविन्द सिंह जी ने सामाजिक बदलाव पर ज्यादा थ्यान दिया, पुरानी विकृत व्यवस्था के सापेक्ष खालसा की अवधारणा को प्रतिष्ठित किया तो वहीं शिवाजी महाराज ने जिस मुक्तिमार्ग को चुना वह था स्वराज। शिवाजी महाराज ने पुरानी सामाजिक व्यवस्था मे कोई परिवर्तन किये बिना ही राजनीतिक शक्ति को जागृत किया।
इन दोनों महानायकों की महान संकल्पशक्ति से मुगल साम्राज्य तो घुटनों पर आ गया मगर जहाँ पंजाब मे जीवंतता का संचार हुआ तो वहीं महाराष्ट्र सामाजिक समता के लिए आज भी संघर्षरत है।
स्वराज और खालसा दोनों ही महानतम अवधारणाएं है फिर भी एक सफल रही तो दूसरी आज अपने अस्तित्व को फिर तलाश रही है।
कारण स्पष्ट है और आज इसी कारण को जड़ से खत्म करने का समय है। शाहस और पराक्रम में मराठे सिखों से बढ़कर थे मगर अपनी सामाजिक संप्रभुता बरकरार न रख सके। एक परजीवी वर्ग उन्हें निरंतर खोखला करता चला गया और अंततः स्वराज के ध्वजवाहक एक एक कर धराशायी होते चले गए। इस कमजोरी के चलते, देश फिर से विदेशी शक्तियों (अंग्रेजों) के अधीन हो गया।
अपनी सामाजिक और आध्यात्मिक संप्रभुता को जागृत कर निसंदेह, हम सभी को उज्ज्वल भविष्य की ओर लेजाने वाले स्वराज के मार्ग पर चलने के लिये संकल्पित हो जाना चाहिये।
इसका माध्यम है प्रत्येक व्यक्ति की मूल्य आधारित शिक्षा व जीवन के व्यापक दृष्टिकोण की समझ को विकसित करना।
🚩 सत श्री अकाल 🚩
🚩 जय हिन्द 🇮🇳 जय स्वराज 🚩
**डी एस गंगवार **
शिक्षक लेखक देहरादून उत्तरखंड भारत