छत्तीसगढ़ के विभिन्न चिकित्सा महाविद्यालयों में 2017 और 2018 के विद्यार्थियों के सामने मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया के नियमों के अलग-अलग निष्कर्षों के कारण समस्या उत्पन्न हो गई है 1.प्रथम वर्ष की परीक्षा अगस्त 2018 में हुई इसका नतीजा 4 महीने बाद 1 दिसंबर 2018 को आया .

2.नियमों के हिसाब से परीक्षा फल आने के 18 महीने पूरे होने के बाद ही द्वितीय प्रोफेशन का एग्जाम होने की पात्रता विद्यार्थी को रहती है इस वर्ष द्वितीय प्रोफेशन परीक्षा 10 फरवरी को हो रही है इस बैच में परीक्षा के लिए 18 महीने की बजाय 14 महीने पूरा हो रहा है .यह 4 महीने केवल नतीजे निकालने में देरी आयुष विश्वविद्यालय से हुई है इसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है. और तो और 18 महीने अटेंडेंस की पात्रता परीक्षा के बाद पूरी होने का सर्कुलर केवल 1 महीने पहले निकाला गया है .

इसका सुझाया गया हल

  1. मुख्य सत्र की परीक्षा के लिए 2 महीने की ग्रेस उपस्थिति डीन के क्षेत्राधिकार में है.

2.अतिरिक्त कक्षाएं लगाकर छात्रों की उपस्थिति को पूरा किया जाए.

  1. भविष्य में सभी नर्सिंग, आयुर्वेदिक और मेडिकल कॉलेज उपस्थिति की समय-समय पर मॉनिटरिंग आयुष विश्वविद्यालय से हो ताकि समय से पहले छात्र और पालको को चेतावनी दी जा सके कि उनकी अटेंडेंस समय पर नहीं पूरी होने पर उन्हें परीक्षा से बाहर कर दिया जाएगा.

  2. 2019 से अलग नियम आने वाले हैं और यह समस्या केवल 2017 और 2018 के मेडिकल छात्रों की ही है.

Categorized in : All News छत्तीसगढ़