![] नई दिल्ली — आज चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में उनके अलावा जस्टिस शरद अरविंद बोबडे, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एस अब्दुल नजीर के सर्वसम्मति से विवादित अयोध्या मामले पर सुनवाई करते हुये रामजन्मभूमि पर ही राम मंदिर बनाने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया गया है। लेकिन इस फैसले के आने के बाद भी पक्षकारों द्वारा रिव्यू पिटीशन (पुनर्विचार याचिका) दाखिल की जा सकती है। रिव्यू पिटीशन की सुनवाई ओपन कोर्ट में नही बल्कि चैम्बर में होती है। रिव्यू पिटीशन याचिका उसी बेंच के पास आती हैजो बेंच फैसला सुनाती है। अब चूकि मुख्य न्यायाधीश 17 नवंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। अगर इसके पहले पुनर्विचार याचिका आती है तो चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की बेंच ही सुनवाई करेगी । लेकिन यदि यह पिटीशन इसके बाद आई तो अगले चीफ जस्टिस यह तय करेंगे कि रिव्यू पिटीशन पर सुनवाई के लिये मौजूदा पीठ में जस्टिस गोगोई की जगह पाँचवाँ जज कौन होगा ? यदि याचिकाकर्ता ओपन कोर्ट में सुनवाई के लिये अनुरोध करेगा और कोर्ट इसके लिये तैयार होता है तो ओपन कोर्ट में सुनवाई हो सकती है। इस स्थिति में सुप्रीम कोर्ट ओपन कोर्ट में सुनवाई के लिये तारीख दे सकता है ।

अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट

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