![] रायपुर — आज भगवान शिव के प्रिय महीने श्रावण का अंतिम सोमवार है ।श्रावण माह में सोम प्रदोष का होना भगवान शिव की प्रसन्नता का प्रतीक है। इस वर्ष श्रावण सोमवार का अंत सोमप्रदोष व्रत से हो रहा है। इस व्रत में शिव आराधना करने से निर्धन को धन, निःसन्तान को सन्तान की प्राप्ति होती है। शिव आराधना का इस योग में प्रसिद्ध एवं अति फलदायक मन्त्र- “ ॐ नमः शंभवाय च मयोभवाय च नम: शंकराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च नमः।।” से श्वेत मँदार का पुष्प चढ़ाने से समस्त मनोवांच्छित फल की प्राप्ति होती है।साथ ही शनि, चन्द्रमा एवं राहु ग्रह की विपरीत गति को भी नियंत्रित करने में श्रावण माह के सोम प्रदोष का विशेष योगदान है। इस समय शनि राहु से पापाक्रांत हेाने के कारण सभी के लिये कष्ट का कारण है अतः यदि सोम प्रदोष व्रत के साथ सर्व कल्याण की भावना से रूद्राभिषेक किया जाये तो सभी कष्ट तथा शनि का ताप समाप्त हो जायेगा। बेलपत्र के साथ समी के पत्र भगवान शिव को अर्पित करने से शनि का ताप समाप्त हो जाता है। शिव-पुराण में दृष्टान्त आया है-“शमीपत्रणि शिवो शनिशमः।।”

सोमदोष में भगवान शिव का घृताभिषेक का भी अति फलदायी महत्व बताया गया है। प्रदोष काल, शिवजी का सोमवार और वैधृति तथा विष्कुंभ योग होना सौभाग्य वृद्धि व आरोग्य वृद्धि के लिये श्रेष्ठ फलदायी रहेगा। जो लोग पूर्ण आस्था और भक्ति के साथ नियमित रूप से सोमवार और सोम प्रदोष व्रत को करते हैं उन्हें धन- धान्य, स्वास्थ्य एवं खुशहाली प्राप्त होती है। ऐसी मान्यता है कि सोम प्रदोष के दिन तमाम देवी-देवता शिवजी की आराधना करने कैलाश पर्वत पर जाते हैं।

– सोम प्रदोष के दिन सुबह जगकर अपने नित्य कर्म से निवृत्त होकर बेलपत्र, गंगाजल, अक्षत, धूप, दीप आदि चढ़ाकर शिवजी का पूजन करना चाहिए।

– इस दिन व्रत करना चाहिये तथा पूरे दिन निराहार रहना चाहिये।

– पूरे दिन ॐ नम: शिवाय मंत्र का जप करें।

– सोम प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल के बीच की जाती है इस दौरान ही शिव जी की पूजा करें।

– पूजा स्थान को शुद्ध करें।

– अगर घर में उचित व्यवस्था ना हो तो व्रतधारी शिव मंदिर जाकर भी पूजा कर सकते हैं।

– कुश के आसन पर बैठकर शिवजी की पूजा विधि-विधान से करें।

– मंत्र- ॐ नम: शिवाय कहते हुये शिव जी को जल अर्पित करें ।

अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट

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