![] हल्द्वानी। यह तो वाकई में आश्चर्य चकित करने वाली बात है कि जिस विभाग में सरकारी खजाना खाली हो रहा हो, आमदनी का ग्राफ भी लगातार नीचे आ रहा हो, पुराने बकायों की वसूली नहीं हो पा रही हो, नयी दरे रिवाईज नहीं हो पा रही हो, जबकि उसी विभाग में कार्यरत कर्मचारी लगातार मालामाल हो रहे हो। सुनने में यह बात अटपटी लग सकती है, लेकिन हो ऐसा ही रहा है। जी हां, नगर निगम के हाउसटैक्स में आय का ग्राफ लगातार घटता जा रहा है। शहर में सर्किट रेट के आधार पर हाउस टैक्स की वसूली उस रफ्तार से नहीं हो रही है जिसकी उम्मीद निगम ने लगा रखी थी। अब भी बडी तादात में निगम की हाउस टैक्स मंे आय गिर रही है और अधिकारी चुप्पी साधकर बैठे है। अपने शहर में विकास का जिम्मा नगर निगम के जिम्मे होता है। शहर की सड़के चलने योग्य बने, गलियों मंे इण्टर लाॅकिंग टाईल्स व खडंजा सलामत हो, पीने का स्वच्छ पानी मिले, रात में लोगों की सुविधा के लिए पर्याप्त रोशनी के साधन हो, बच्चों के मनोरंजन के लिए पार्क हो, नाले व नालियों के निर्माण के साथ उनकी सफाई व समुचित प्रबन्ध हो, शहरवासियांे को यह तमाम सुविधाएं मिलती रहे। इसके लिए नगर निगम शहरवासियों से हाउस टैक्स, वाटर टैक्स, सीवर टैक्स व सफाई टैक्स वसूलता है। शहर के विकास मंे कही कोई बाधा ना हो इसके लिए शासन स्तर पर छठें वित्त अयोग के साथ साथ अवस्थापना निधि का प्रावधान किया जाता है। अवस्थापना निधि में शहर के विकास के किस मद में कितना कितना पैसा खर्च करना है, इसके लिए नगर निगम के निर्वाचित पार्षद प्रस्ताव देते है। महापौर इन तमाम प्रस्तावों के लिए अपनी सस्तुति करती है। फिर इन प्रस्तावों के लिए बजट आदि की राशि का प्रावधान करने के लिए यह प्रस्ताव नगर आयुक्त के स्तर से शासन को अग्रसरित किया जाता है।

निगम की आय के स्रोंत

स्वच्छता शुल्क, तहबाजारी शुल्क, जन्म-मृत्यु शुल्क, किराया शुल्क, मानचित्र शुल्क, रोड कटिंग, अभिलेखागार, ठेकेदार पंजीकरण शुल्क, ठेकेदार जमानत, मीट लाईसेन्स, गृह कर, सीवर कर, विज्ञापन कर, शो टेक्स, निजी सम्पति या लाईसेन्स, चिकित्सा संस्थानों पर कर, पार्किग शुल्क, रिक्शा पंजीकरण, विनियोजन पर ब्याज, 2 प्रतिशत स्टांप शुल्क, निगम सम्पति के किराये समेत अन्य कई दण्ड से मिलने वाला शुल्क भी शामिल है।

आय में गिरावट से प्रभावित होता विकास #

निर्माण विभाग, लेखा विभाग और स्वास्थ्य विभाग के चलते नगर निगम के विकास कार्यो पर संकट आ सकता है। सड़क, नाला – नाली समेत अन्य कार्यो के लिए शहर गुहार लगा रहा है। करोड़ो के प्रस्ताव भी तैयार है, लेकिन नगर निगम का खजाना खाली है। अवस्थापना निधि और 14वें वित्त आयोग के बजट में कुछ ही कार्य सम्भव है।

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