देहरादून नगर पालिका हरबर्टपुर पर क्षेत्रीय लोगों ने लगाया आरोप की माननीय उच्च न्यायालय में विवादास्पद भूमि वार्ड नंबर 1, बंशीपुर में जिस पर किसी भी तरह के निर्माण कार्य पर माननीय उच्च न्यायालय द्वारा रोक लगा दी गई और इस भूमि की एसआईटी जांच चल रही है बावजूद इस सब के नगर पालिका हरबर्टपुर ने एक निजी स्कूल को लाभ पहुंचाने की मंशा से बिना प्रस्ताव पारित किए एक सड़क का निर्माण कार्य करवा दिया गया जबकि एक सभासद का कहना यह भी है की फरवरी माह में नगर पालिका परिषद की आखिरी बैठक हुई थी जिसमें वार्ड नंबर 1 की सभासद उपस्थित भी नहीं थी और ना ही इस सड़क का कोई प्रस्ताव बैठक में रखा गया था फिर कैसे किसी निजी स्कूल को लाभ पहुंचाने की मंशा से सभी नियमों को दरकिनार करते हुए और माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन करते हुए सड़क का निर्माण नगर पालिका द्वारा कराया जा सकता है।
यह सड़क मुख्य सड़क से सीधे एक निजी स्कूल तक के लिए बनाई गई है जब इस मामले में नगर पालिका अध्यक्ष और ई़.ओ से जानकारी चाही तो उनका कहना था कि उनको मालूम ही नहीं था कि यह भूमि माननीय उच्च न्यायालय में विवादास्पद है और इस पर कोई एस.आई.टी जांच चल रही है और ना ही उन्हें दून घाटी विशेष प्राधिकरण के द्वारा कोई सूचना इस संबध दी गई है। नगर पालिका हरबर्टपुर से दूनघाटी विशेष प्राधिकरण को दो बार चिट्ठी लिखकर जानकारी भी चाही गई थी लेकिन उनकी किसी भी चिट्ठी का जवाब नहीं दिया गया था।इन्हीं सब बातों से अनभिज्ञ होने के कारण नगर पालिका हरबर्टपुर द्वारा सड़क का निर्माण करवा दिया गया है जबकि इस भूमि पर अवैध कटान कर अवैध प्लाटिंग किए जाने का मामला अखबारों और टीवी चैनलों की सुर्खियां बना हुआ था। क्या ऐसा हो सकता है कि नगरपालिका में बैठे सभी जिम्मेदार लोग इन बातों से अनभिज्ञ रहे हो ?
आपको बता दें कि हरबर्टपुर नगर पालिका के वार्ड नंबर 1 बंशीपुर यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे भू-माफियाओं द्वारा बहुत बड़े पैमाने पर आम के हरे भरे पेड़ों के बाग का कटान लगाकर अवैध प्लाटिंग कर आवैध कॉलोनी बसाई जा रही थी और बहुत महंगे दामों पर प्लॉट बेचे जा रहे थे जो कि संबंधित विभागों की मिलीभगत के चलते यह सब हो रहा था। इस अवैध प्लाटिंग में ना तो नगरपालिका ने कोई आपत्ति जताई थी और ना ही दून घाटी विशेष प्राधिकरण ने कोई आपत्ति दर्ज कराई थी। भू-माफियाओं ने किस आधार पर सालों पुराने हरे-भरे आम के बगीचे को काट डाला था?कैसे बिना साडा से नक्शा स्वीकृत करवाए प्लॉट काटकर कॉलोनी बनाई जा रही थी और अगर साडा से नक्शे स्वीकृत नहीं करवाए गए थे तो साडा के अधिकारियों ने क्यों अपनी आपत्ति दर्ज नहीं की?
यह पूरा प्रकरण जब माननीय उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका के तहत पहुंचा था तो माननीय उच्च न्यायालय ने इस भूमि पर किसी भी तरह के निर्माण कार्य और क्रय-विक्रय पर रोक लगा दी थी और मामले की जांच एस.आई.टी को सौंप दी गई थी।
वही दूसरी अर इस भूमि पर एक स्कूल का निर्माण हुआ है जो कि प्रकरण कोर्ट में जाने से पहले 1 मंजिला था लेकिन अब यह स्कूल दो मंजिला हो चुका है। क्या इसकी दूसरी मंजिल का निर्माण जादुई तरीके से हुआ या कोर्ट ने इसके निर्माण कार्य के लिए छूट दे दी थी ।
सूत्रों की मानें तो इस स्कूल का लैंड यूज तक चेंज नहीं हुआ है और सिंचाई विभाग की भी जमीन इस स्कूल द्वारा कब्जायी गई है।अपनी ऊंची पहुंच के चलते इस स्कूल के मालिक ने माननीय उच्च न्यायालय की रोक के बावजूद दूसरी मंजिल का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया है और स्कूल का संचालन भी निरंतर रूप से कर रहा है।
रिपोर्ट-राजिक खान
समाचार इंडिया
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