![] बीजेपी के चुनावी वादों में से एक था कि वह रेलवे, सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर पर 1.44 ट्रिलियन डॉलर खर्च करेंगे. लेकिन इतनी बड़ी रकम कहां से आएगी? जानकार मानते हैं कि मोदी इसके लिए निजीकरण की राह अपना सकते हैं.
मोदी ने अपने पहले कार्यकाल में सरकारी उद्यमों को बेचने के अपने वादों पर धीमी गति से काम किया है. एयर इंडिया लंबे वक्त से कर्ज़ में डूबी है. सरकार ने इसके शेयर बेचने की प्रक्रिया शुरू की लेकिन कोई ख़रीददार नहीं मिला और एयर इंडिया नहीं बिक सकी.
गौरांग शेट्टी मानते हैं कि अपने दूसरे कार्यकाल में मोदी निजीकरण को तेज़ी से अपनाएंगे।
पिछले कुछ सालों से निजी निवेश पिछड़ रहा है और पिछले एक दशक में भारत की प्रभावशाली आर्थिक वृद्धि काफी हद तक सरकारी खर्चों से पर ही चल रही है.
अपनी पहली सरकार में नरेंद्र मोदी ने लाइसेंसी राज में कुछ कमी की जिसकी मदद से भारत विश्व बैंक की व्यापार करने की सहूलियत वाली सूची में 77वें पायदान पर पहुंच सका, जो साल 2014 में 134वें स्थान पर था.अपनी पहली सरकार में नरेंद्र मोदी ने लाइसेंसी राज में कुछ कमी की जिसकी मदद से भारत विश्व बैंक की व्यापार करने की सहूलियत वाली सूची में 77वें पायदान पर पहुंच सका, जो साल 2014 में 134वें स्थान पर था.
जोशी मनाते हैं कि आने वाले दो साल में सरकार को कड़े फ़ैसले लेने होंगे. हो सकता है कि इसका असर तुरंत ना नज़र आए लेकिन ये भारत की वृद्धि में बड़ा फर्क लाएंगे.
Categorized in : देश