![] मोदी सरकार को उसके पहले कार्यकाल में सबसे ज्यादा रोज़गार के मुद्दे पर घेरा गया. सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2017-18 के बीच बेरोज़गारी 45 साल में सबसे ज़्यादा रही.

जोशी मानते हैं कि सरकार को अभी भवन निर्माण और कपड़ा इंडस्ट्री जैसे लेबर-सेक्टर पर फ़ोकस करने की ज़रूरत है, ताकि तत्काल प्रभाव से रोजगार पैदा किया जा सके. इसके अलावा सरकार को हेल्थ केयर जैसी इंडस्ट्री पर भी काम करना चाहिए ताकि लंबी अवधि वाली नौकरियां भी पैदा की जा सकें.

हेल्थ सेक्टर में नौकरियों पर जोशी कहते हैं, “सरकार अपनी स्वास्थ्य सेवा और जन कल्याण योजनाओं को बढ़ाना चाहती है, इसके लिए डॉक्टरों और सर्जनों के अलावा पैरामेडिक्स और नर्सों की भी आवश्यकता है.”

घटता निर्यात भी रोजगार के रास्ते में एक बड़ी रुकावट पैदा करता है.

सरकार से ऐसी नीतियों को प्राथमिकता देने की उम्मीद है जो छोटे और मध्यम व्यापार को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएंगी.

नई जीडीपी दर से साफ है कि भारत की अर्थव्यवस्था तेज़ी से नीचे की ओर गिर रही है.

चीन के अलग भारत की आर्थिक वृद्धि का सबसे बड़ा कारक यहां की घरेलू खपत है. पिछले 15 सालों से घरेलू खपत ही अर्थव्यवस्था को बढ़ाने में सबसे अहम भूमिका निभाता रहा है. लेकिन हालिया डेटा से साफ़ है कि उपभोक्ताओं की खरीदने की क्षमता में कमी आई है.

कारों-एसयूवी की बिक्री पिछले सात सालों के सबसे निचले पायदान पर पहुंच गई है. ट्रैक्टर, मोटरसाइकिल, स्कूटर की बिक्री में भी कमी हुई है. बैंक से कर्ज़ लेने की मांग भी तेज़ी से बढ़ी है. हालिया तिमाहियों में हिंदुस्तान यूनिलीवर की आय वृद्धि में भी कमी आई है. इन तथ्यों को देखते हुए ये समझा जा सकता है कि उपभोक्ता की खरीदने की क्षमता में कमी आई है.बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में वादा किया कि वह मध्यम आय वाले परिवारों के हाथों में अधिक नकदी और अधिक क्रय शक्ति सुनिश्चित करने के लिए आय करों में कटौती करेगी.

एक ब्रोकरेज कंपनी के वाइस प्रेसिटेंड गौरांग शेट्टी का मानना है कि सरकार को अपने अगले बजट (जुलाई) में पर्सनल और कॉरपोरेट टैक्स में भी कटौती करनी चाहिए.

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