मराठा साम्राज्य की नींव छत्रपती शिवाजी महाराज ने 1674 में डाली। उन्होने कई वर्ष औरंगज़ेब के मुगल साम्राज्य से संघर्ष किया। बाद में आये पेशवाओनें इसे उत्तर भारत तक बढाया, ये साम्राज्य 1818 तक चला और लगभग पूरे भारत में फैल गया। आज हम जानेंगे मुग़ल इतिहासकार खफी_खान मराठोंके बारे में क्या लिखा है ।
#मुगल_इतिहासकार_खफी_खान_लिखते हैं …
यह वही हिंदी अनुवाद है
किस खून के है यह मराठे ?
अब शिवाजी महाराज नहीं है
हमने संभाजी को मार दिया।
राजाराम अब वह जिंदा नहीं है
संभाजी की पत्नी और बेटे हमारे कब्जे में हैं
राजाराम महाराज की पत्नी, तारारानी कुछ हज़ार सैनिकों के साथ हमारी लाखों की फ़ौज के साथ लोहा ले रही है।
ईरान से लेकर उत्तर-दक्षिण भारत हमारे बादशहा से डरता है!
लेकिन ये मराठे ……..
हमारे सैनिकौ को सपनों मे और घोड़ों को पानी में दिख रहे है !
इनके किले मे छः सौ, सात सो की फौज हमारे हजारों सैनिकों के खिलाफ लडती है लेकिन यदि हम उन्हें खलीता(पत्र) भेजते हैं, किल्ला खाली करो नही तो हम किला जीतते ही तुम्हारे बीवी बच्चोंको मार देंगे, इसके विपरित ये मराठों के बच्चे डरते नही और औरते यह खलीता(पत्र) चूल्हे में फेंक देती है !.तब लगता है यह मराठे क्या चीज है।मरने को ही हर वक्त तैयार और मारने लगे तो पिला भंडारा लगानेवाले लोग हमारे खून से लाल हो जाते है।
शिवाजी महाराज का स्वाभिमान से रहने और संभाजी महाराज के प्राण चले गये तो भी आत्मसमर्पण न कर यह अपने राजा की शिक्षा का पालन करने वाले मराठे है !
आज हमारे बादशाह का अंत हुवा,
उन्होंने कई राजाओं को समाप्त किया, लेकिन आज वे काफिर मराठों द्वारा पराजित हुए !
या खुदा क्या लोग है यह मराठे?
तोफ की आवाज़ तक कोई अपने प्राण नहीं छोड़ता।
तो कोई अपने लड़के कि शादी छोड़ कर किल्ले की मोहिमि में जाता है।
तो कोई मृत्यु की पालखी पर हस्ते हस्ते चढ़ जाता है।
आपने राजा के शब्द के खातिर कोई पागल हाथी से टक्कर लेता है।
कोई झूठा शिवाजी के रूप में मृत्यु के बिस्तर में सो जाता है !
तो कोई 80 साल का बूढ़ा किला जीतते समय जवान शत्रु को धूल चटाता है।
बच्चे, जिनकी अभी मूंछ भी नही निकली वह भी 20 शत्रु पर भारी पड़ जाता है,
कहीं पर 7 बहादुर मराठे तीस हजार सैनिकों पर कहर ढाते है।
तो कोई 60 मावला लेके गढ़ जीत लेते है ..!
शिवाजी द्वारा किए गए महान काम और संभाजी के बलिदान की प्राप्ति के लिए उनका असाधारण बलिदान एक महान इनाम है ..!
छत्रपति शिवाजी विश्व परिषद सूत्र
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